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नगर में हुई भव्य अगवानी : आचार्य श्री अनेकांत सागरजी महाराज ससंघ का मंगल प्रवेश


नगर में प्रथम बार आचार्य श्री अभिनंदन सागरजी के परम शिष्य महामुनिराज आचार्य श्री अनेकांत सागरजी महाराज ससंघ का आगमन गुजरी से गुलझरा नाके पर हुआ, जहां जैन समाज ने आगवानी की। एक जुलूस के साथ आचार्य श्री ससंघ को धांमनोद नगर में मेन चौराहे से मन्दिर तक ढोलक के साथ लाया गया। पढ़िए दीपक प्रधान की विशेष रिपोर्ट…


धांमनोद। नगर में प्रथम बार आचार्य श्री अभिनंदन सागरजी के परम शिष्य महामुनिराजआचार्य श्री अनेकांत सागरजी महाराज ससंघ का आगमन गुजरी से गुलझरा नाके पर हुआ, जहां जैन समाज ने आगवानी की। एक जुलूस के साथ आचार्य श्री ससंघ को धांमनोद नगर में मेन चौराहे से मन्दिर तक ढोलक के साथ लाया गया। जगह-जगह समाजजनों ने अपने घर के सामने पाद प्रक्षालन किया व आरती की। जुलूस पहुंचा मन्दिर जी मे जहां भगवान के दर्शन कर प्रथमाचार्य श्री शांतिसागरजी महाराज के आचार्यपदारोहण के 100 वर्ष पूर्ण होने पर मन्दिर में भव्य कार्यक्रम आयोजित किया गया।

जिसमें मंगलाचरण प्रीति जैन व सोना जैन ने किया। इस अवसर समाज अध्य्क्ष महेश जैन विचार रखते हुए कहा कि धांमनोद की पावन भूमि धन्य हो गई आचार्य श्री के आने से। श्री शांतिसागरजी महाराज के चित्र का अनावरण राजा जैन, राकेश जैन, संदीप मण्डलोई व मुनिसेवा समिति के सचिन जैन व सजंय जैन ने किया। दीप प्रज्वलन महेश जैन, शैलेन्द्र जैन व कार्यकारिणी ने किया। इस अवसर पर आचार्य श्री अनेकाकांतसागरजी महाराज ने अपने प्रवचन में धांमनोद की भूमि को धर्म की भूमि बताया। उन्होंने कहा कि यह बीच सेंटर में होने से सभी सन्तों का आने-जाने का मार्ग है। यह सेतु का कार्य करता है।

महाराज जी ने कहा कि कोरोना काल में कोई भी काम नहीं आया, काम आया धर्म। इसलिए धर्म को कभी मत छोड़ना। अच्छे संस्कार को ग्रहण करें, संस्कार शिविर लगाएं व बेटे- बेटियों को संस्कार सिखाएं। यह सबसे बड़ी पूंजी रहेगी। बेटे व बेटियों की शादी समाज में ही करें, जिससे जैन धर्म भी जीवित रहेगा।इस दौरान दिल्ली से पधारे अतिथियों का मोती की माला व पंचरगी दुप्पटे से सम्मान किया गया। कार्यकम का संचालन सचिव दीपक प्रधान ने किया। महाराज जी दिल्ली से विहार करते हुए 900 किलो मीटर पैदल चल रहे हैं। आगे 900 किलो मीटर और चलना है। संघ जून तक महाराष्ट्र के समदोली में पहुंचेगा। आज मुनिसघ की आहार चर्या मन्दिर के ऊपर संत निवास पर हुई। विहार निमरानी की ओर होगा। व्यवस्थाओं में जैन समाज व प्रबंधन कार्यकारिणी व मुनिसेवा समिति का सराहनीय सहयोग मिल रहा है।

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