मुनि श्री ने कहा- आंखें प्रकृति का अनमोल तोहफा, इन्हें संभालो
ललितपुर.राजीव सिंघई। श्री अभिनंदनोदय तीर्थ क्षेत्र क्षेत्रपाल मंदिर में धर्मसभा को धर्म का अमृत पिलाते हुए मुनि सुधासागर महाराज ने कहा कि जीवन में जो भी प्राप्त करना चाहते हो, वह दूसरों को देना शुरू करो। सुख चाहते हो सुख बांटो, दुख चाहते हो तो दूसरों को दुखी करो। यह जीवन का सीधा सा गणित है जो प्राप्त करना चाहते हो, वह देना शुरू करो। उन्होंने संसार के सभी जीवों को मन और इन्द्रियों के उपयोग करने अचूक दवा बताई।
उन्होंने कहा कि प्रत्येक मनुष्य को प्रकृति से मन, आंखें, कान, मुख, नाक आदि मिले। मन के द्वारा हम अच्छा या बुरा सोचते हैं, आंखों से अच्छा या बुरा देखते हैं, कानों से अच्छा या बुरा सुनते हैं, मुख से अच्छा या बुरा बोलते हैं, अच्छा या बुरा खाते हें, नाक से अच्छा या बुरा सूंघते हैं। उन्होंने कहा कि प्रकृति ने तुम्हें ये सब तुम्हारे पुण्य से दिया है। अगर इसका अच्छा उपयोग करोगे तो मनुष्य बनकर भगवान भी बन सकते हो और बुरा उपयोग करोगे तो आप स्वयं समझदार हो।
मुनि सुधासागर महाराज ने खुशहाल जिन्दगी जीने का सूत्र देते हुए कहा कि जो भी तुम्हारी जिन्दगी में आये, वह धन्य हो जाये ऐसी साधना करो। तुम्हें मन मिला है इससे अच्छा सोचो, टेंशन मत करो। इसे शान्त रखो इसे खुश रखो, आनंदित करो, मन को पवित्र रखो, छल- कपट नहीं करो। अगर मन खुश हो गया तो तुम्हें बार-बार मन मिलेगा और एक दिन यह सुन्दर मन तुम्हें परमात्मा भी बना देगा और इसका दुरुपयोग किया तो उस योनि में जन्म लोगे जहां मन ही नहीं होता।

मन मिला तो भी पागल बनोगे। सोचने- समझने की शक्ति नहीं मिलेगी। अच्छे- बुरे का विवेक ही नहीं रहेगा। उन्होंने कहा कि दुनिया में अनेकानेक जीव ऐसे भी हैं जिनके मन ही नहीं होता जैसे वृक्ष, चींटी, मच्छर, खटमल, मक्खी आदि ऐसी योनि में मन के बिना तुम्हें घोर दुख उठाना पडे़गा। उन्होंने कहा कि तुम तन को तो सजाते हो, जिस पर लोगों की नजर रहती है पर मन को नहीं सजाते जिस पर भगवान की नजर रहती है। इसलिए मन को शृंगारित करो।
आंखों के विषय पर सीख देते हुए कहा कि नेत्र भी प्राण हैं, आंखें प्रकृति का अनमोल तोहफा हैं। इसलिए आंखों से अच्छा देखो, समय से अधिक मोबाइल, टीवी मत देखो, सीमा से अधिक देखने पर आंखें थक जाती हैं और आंखों की रोशनी भी कम हो जाती है। बहुत से साइड- इफेक्ट हो जाते हैं तुम अंधे भी हो सकते हो।
उन्होंने कहा कि शक्ति से अधिक आंखों का उपयोग करना आंखों की हत्या करने के समान है।
कर्मरूपी आंखें तुम्हें ऐसा अभिशाप देगी कि तुम आंख के बिना ही जन्म लोगे और उस योनि में जन्म लोगे जहां आखें ही नहीं मिलती। इसलिए तुम्हें पुण्य से जो मिला है, उसका सही उपयोग करो।
धर्मसभा का संचालन महामंत्री डा. अक्षय टडैया ने किया। सोमवार को एलक धैर्यसागर महाराज को आहारदान मुकेश नोहरकला परिवार एवं क्षुल्लक गम्भीर सागर महाराज को आहारदान राजीव हिरावल परिवार को मिला।
आजभगवान अभिनन्दननाथ जी की शान्तिधारा का सौभाग्य ब्यावर निवासी अंकुर जैन सिंघई एवं चन्दावाई सांदीप सराफ अलंकार ज्वेलर्स को प्राप्त हुआ। मंदिर प्रबंधक राजेन्द्र जैन थनवारा, मोदी पंकज जैन एवं समस्तपंचायत पदाधिकारी एवं सदस्यगण एवं स्वयंसेवी संस्थायें अपनी- अपनी व्यवस्थाओं को पूरी तरह देख रहे हैं।












