मुंबई निवासी ममता गांधी ने आचार्यश्री सुनीलसागर जी को पत्र लिखकर अपने अनुभव साझा किए हैं। जिसमें उन्होंने गुरुकृपा का बखान कर ऐसी प्रभावना व्यक्त की है, जो समाजजनों के लिए प्रेरणादायक है। मुंबई से अभिषेक जैन लुहाड़िया की यह विशेष प्रस्तुति…
गुरुं वन्दे मातृपम्। गुरुं वन्दे पितृपम्। गुरुं वन्दे कृणामयम्। गुरुं वन्दे सुज्ञानमयम्। गुरुं वन्दे सिद्धिप्रदं। गुरुं वन्दे बुद्धिप्रदं। गुरुं वन्दे विमलमतिम्। गुरुं वन्दे अमलकृतिम्। चतुर्थ पट्टाचार्य आचार्यश्री सुनीलसागरजी गुरुदेव को, मन, वचन, काय से त्रिवार नमोस्तु नमोस्तु नमोस्तु।।
“मेवा मले के ना मले मारे सेवा तमारी करवी छे”
मुंबई। मुंबई निवासी ममता गांधी ने आचार्यश्री सुनीलसागर जी को पत्र लिखकर अपने अनुभव साझा किए हैं। जिसमें उन्होंने गुरुकृपा का बखान कर ऐसी प्रभावना व्यक्त की है, जो समाजजनों के लिए प्रेरणादायक है। उन्होंने कहा कि उपरोक्त बात मेरे लिए तो पूरी-पूरी सार्थक हुई है, जैनाचार के माध्यम से मैं गुरुदेव और जिनधर्म की प्रभावना करती रही और मुझे मेवा ही मेवा मिलता रहा। हमारे गुरुदेव के वात्सल्य और आशीर्वाद की तो क्या बात करें।
आचार्य श्री के आशीर्वाद मिलते रहे और मैं हर एक मुश्किल को पार करती रही, यहा तक कि मैं, ज़िंदगी तक जीत गई। इतना दिया मेरे गुरुदेव ने, कि मेरी झोली छोटी पड़ गई। ममता गांधी ने बताया कि मैं 2011 से गुरुदेव ससंघ जब मुंबई पधारे तब से उनके सानिध्य में जुड़ी हुई हूं, या फिर ऐसा कहो कि तब से मेरी जिंदगी में खुशियों का उदय हुआ। गुरुदेव के आशीर्वाद से हर बात अच्छे से चल रही थी। अचानक से 2017 में मुझे यूट्रस में तकलीफ हुई। मुंबई के लेटेस्ट डॉक्टर के हिसाब से रिपोर्ट करवाया तो उन्होंने बोला कि एक दिन भी रुकना नहीं है। कल ही दो ऑपरेशन करवाने हैं। अब मैं आप सबको क्या बताऊं, मुझे तो सुबह शाम मेरे गुरुदेव के सिवा कुछ भी याद ही नहीं था। मैंने तुरंत अमृता दीदी को कॉल लगाया और बोला कि गुरुदेव को नमोस्तु बोलना और गुरुदेव से ऑपरेशन के लिए आशीर्वाद मांगना। 15 मिनट में दीदी का कॉल आया कि आचार्य श्री ने आशीर्वाद दिया है और आपको कोई ऑपरेशन नहीं करवाना है। मैंने घर पर बोल दिया कि अब मुझे कोई ऑपरेशन नहीं करवाना है। घरवालों की तसल्ली के लिए हम दूसरे दिन डॉक्टर के पास वही रिपोर्ट लेकर गए। आप सब यकीन नहीं करोगे। डॉक्टर ने तुरंत बोल दिया कि आपको कोई भी ऑपरेशन नहीं करना है
बस यही है मेरे गुरुदेव मेरे भगवान
इसके बाद मुझे उसी बात के लिए कभी भी दर्द नहीं हुआ है। फिर 2022 में आचार्य श्री जयपुर में थे। तब हम 4 दिन वहीं पर गुरुदेव के दर्शन के लिए गए थे। वहीं से आचार्य श्री के आशीर्वाद लेकर हम मुंबई पहुंचे। उसके दूसरे ही दिन मुझे ब्रेन स्ट्रोक आया। मेरा लेफ्ट साइड पैरालिसिस जैसा हो रहा था। पर मेरी किस्मत देखिए, मेरे साथ हमेशा से गुरुदेव के आशीर्वाद रहे हैं। इतनी बड़ी तकलीफ के बाद भी गुरुदेव ने वहीं से आशीर्वाद भेजा तो मेरी सारी तकलीफ दूर हो गई और मैं फिर से चलने-फिरने लगी और धर्म प्रभावना करने लगी
बस गुरुवर की कृपा से मेरा काम हो रहा था
करते थे मेरे गुरुवर, मेरा नाम हो रहा था। एक समय ऐसा आ गया कि गुरुदेव के दर्शन न मिले तो मुझे चैन नहीं मिलता था। मैं हर महीने मुंबई से गुरुदेव के दर्शन के लिए जाने लगी थी। कई बार तो कुछ दिन ऐसे होते थे कि गुरुदेव ने मुझे सपने में आकर दर्शन दिए हैं। यही हैं मेरे गुरुदेव के चमत्कार। जब गुरुदेव के दर्शन किए बहुत दिन हो गए थे और गुरुदेव सरवाड़ में थे तब हम एक दिन के लिए सरवाड़ पहुंचे और वहां पर प्रतिष्ठा हो रही थी तो हमें लगा कि गुरुदेव पूरे दिन कार्यक्रम में व्यस्त रहेंगे और हमें गुरुदेव का सानिध्य अधिक देर नहीं मिलेगा। इसी लालच में हम सुबह 5 बजे गुरुदेव के पास दर्शन के लिए पहुंचे। मैंने गुरुदेव के दर्शन किए और नमोस्तु करके जैसे ही बैठने गई और सीढ़ियों से गिर गई और सामने मेरे गुरुदेव, मेरे भगवान थे। तो क्या मजाल कि मुझे कुछ होता। जितने भी श्रावक बैठे थे। सबने बोला कि जो भी गिरी है वो गई… पर आचार्य श्री ने तुरंत बोला- ‘वो दो मिनट में खड़ी हो जाएगी।’ आप सब यकीन मानो कि मैं तीन गुलाटी खाने के बाद भी और भारी शरीर होने के बाद भी मुझे खरोंच तक नहीं आई क्योंकि, गुरुदेव मेरे सामने थे और मैंने दूसरे ही मिनट खड़े होकर नमोस्तु बोला। बाकी सब महाराज जी का कहना था कि ‘तुम यहां बहुत बड़ी घात मिटाने आई हो।’ इसे कहते हैं कि सूली का घाव सुई से टल गया और मैं बिना किसी तकलीफ के अपने घर मुंबई पहुंच गई।
मैं आप सब गुरु भक्तों को कहना चाहूंगी कि सच्चे मन से गुरु भक्ति में समर्पित हो जाओ तो गुरुदेव के आशीर्वाद हर पल आपके साथ रहते हैं। 2025 में गुरुदेव जब संतरामपुर थे। तब मैं दो दिन के लिए वहाँ दर्शन के लिए गई थी। वहां से मुंबई आने के बाद मुझे फिर से ब्रेन स्ट्रोक आया। उसके बाद मेरे लेफ्ट साइड और चेहरे के लेफ्ट साइड पर पैरालिसिस का असर हुआ। कहते हैं ना कि गुरु का हाथ पकड़ने की बजाय अपने हाथ गुरु को पकड़ा दो क्योंकि, हम गुरु का हाथ गलती से छोड़ सकते हैं किंतु गुरु हाथ पकड़ेंगे तो कभी नहीं छोड़ेंगे।
हे गुरुदेव, एक पल आपका नाम ना बिसरूँ, मुझपे इतनी रहमत कर दे,
हर साँस में सिमरन करूँ, मुझपे इतनी बरकत कर दे।
जब मैं हॉस्पिटल में थी तब मेरे परिवारवालों ने डब्बू भैया को कॉल किया और बोला कि मम्मी को अर्जेन्ट गुरुदेव का दर्शन करवा दो। यहां पर मैं डब्बू भैया का भी शुक्रिया करना चाहूंगी कि हर बार उन्होंने मुझे हर बार गुरुदेव के दर्शन करवाए हैं।
ऐ मुसीबत, तू मेरे सर पर बेकार में ही मँडराती है, गौर से देख मेरे अंग-संग मेरे गुरुदेव की छत्रछाया लहराती है!
एक समय ऐसा आया कि मेरी हालत क्रिटिकल हो गई। डॉक्टर ने बोल दिया कि ब्रेन एंजियोप्लास्टी करने का 10 प्रतिशत रिस्क है, पर मुझे मेरे गुरुदेव के आशीर्वाद पर पूरा भरोसा था कि मुझे कुछ नहीं होगा और आज मेरा एंजियोप्लास्टी होकर मुझे डिस्चार्ज भी मिल गया और मुझे कोई भी तकलीफ नहीं है क्योंकि जिस दिन ऑपरेशन था। उसके पहले दिन मुझे सुनील भाई गांधीनगर वाले ने मुझे गुरुदेव के दर्शन करवाए। गुरु कृपा इतनी है कि खराब नेटवर्क होने के बावजूद भी गुरुवर मुझे देख पाए और आशीर्वाद दिया।
खुद पर हो विश्वास और गुरु पर हो आस्था,फिर कितनी भी आएं बाधाएं मिल जाता है रास्ता।
हे गुरुदेव, हम सब भक्तों पर कृपा बरसाते रहना।
गुरुदेव के श्री चरणों में श्रद्धा सुमन संग वंदन।
जिनकी कृपा-नीर से जीवन हुआ चंदन।













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