पारसनाथ दिगंबर जैन मंझार मंदिर में विराजमान मुनि श्री सुधासागर जी महाराज ने गंधोदक की महिमा बताई। पढ़िये राजीव सिंघई की रिपोर्ट…
टीकमगढ़। पारसनाथ दिगंबर जैन मंझार मंदिर में निर्यापक मुनि श्री सुधासागर जी महाराज एवं क्षुल्लक गंभीर सागर जी महाराज विराजमान हैं। प्रतिदिन मुनि श्री के प्रवचन एवं शाम को जिज्ञासा समाधान का आयोजन किया जा रहा है। मंच संचालन अमित भैया जबलपुर द्वारा किया जा रहा है। मुनि संघ का टीकमगढ़ समाज को एक महीने से सानिध्य प्राप्त हो रहा है ।
उनके सानिध्य में प्रतिदिन अनेक धार्मिक आयोजन चल रहे हैं। मुनि संघ के सानिध्य में 16 मार्च को जैन धर्म के प्रथम तीर्थंकर भगवान आदिनाथ की जन्म जयंती मनाई जाएगी। रविवार को छिंदवाड़ा जैन समाज द्वारा मुनि श्री को श्रीफल भेंट कर पंचकल्याणक महोत्सव के लिए निवेदन किया गया।

गंधोदक होता है अतिशयकारी
मुनि श्री ने अतिशयकारी पारसनाथ धाम पंचायती मंदिर में अपने प्रवचनों में धर्म सभा को संबोधित करते हुए कहा कि हमें अपने जीवन काल में अनेक अनेक पुण्य का संचय करने से पुरुष पर्याय मिलती है। पांच पर्यायो में पुरुष पर्याय सबसे श्रेष्ठ मानी गई है। मुनि श्री ने कहा कि आप लोग प्रतिदिन सुबह से मंदिर जाकर भगवान का अभिषेक एवं शांति धारा करके अपने जीवन को धन्य कर सकते हैं। मुनि श्री ने कहा कि जैन धर्म में गंधोदक का अपना अलग ही अतिशय है।
अपने द्वारा स्वयं श्रीजी का अभिषेक करके गंधोदक लगाया जाए, वह कई गुना अधिक फलदायी होता है। मुनि श्री ने कहा कि मैंने नंदीश्वर कॉलोनी में बताया था कि मैंने शास्त्रों में खूब खोजा लेकिन शास्त्रों में गंधोदक के कटोरे का कहीं उल्लेख नहीं मिलता है। स्वयं के द्वारा श्रीजी का अभिषेक करके बनाया हुआ गंधोदक बहुत ही अतिशयकारी होता है। मुनिश्री ने कहा कि तुम लोग क्या करते हो, मंदिर जाते हो मंदिर आए और गंधोदक लगा लिया। उस गंधोदक को कितने लोगों ने अपने हाथों से स्पर्श किया, तुम्हें नहीं पता, यह बहुत खतरनाक होता है।
मुनि श्री ने कहा कि तंत्र विद्या कहती है कि सामने वाले ने क्या किया, वह प्रभावशाली नहीं है, तुमने उसे स्वीकार कर लिया वह प्रभावशाली है। तंत्र विद्या का नियम है कि तुम उसे स्वीकार नहीं करना तो तुम्हारा कुछ नहीं बिगाड़ पाएगी। मुनि श्री ने कहा कि हर व्यक्ति के भाव अलग-अलग होते हैं। सर्दी वाले को गर्मी की दवाई दे दी जाए तो उसका दुष्परिणाम होगा। मुनि श्री ने कहा कि तुम्हें गंधोदक का प्रभाव तुम्हारे द्वारा बनाए गए गंधोदक से पड़ेगा। इसलिए गंधोदक वह प्रभावकारी है, जब तुम स्वयं मंदिर जाकर भगवान का अभिषेक करते हो, वह गंधोदक चमत्कारी एवं अतिशयकारी होता है। वह तुम्हारे जीवन की दिशा और दशा बदलने वाला होगा।













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