ज्ञानतीर्थ जैन मन्दिर में अक्षय तृतीया के पावन अवसर पर 22 अप्रैल को भगवान आदिनाथ का महमस्तकाभिषेक महोत्सव मनाया जाएगा। इसी दिन सुबह ज्ञानतीर्थ पर बालाचार्य श्री निपूर्णनन्दी जी महाराज ससंघ का मंगल प्रवेश भी हो रहा है। पढ़िए मनोज नायक की रिपोर्ट…
मुरैना। ज्ञानतीर्थ जैन मन्दिर में अक्षय तृतीया के पावन अवसर पर 22 अप्रैल को भगवान आदिनाथ का महमस्तकाभिषेक महोत्सव मनाया जाएगा। सौभाग्य से इसी दिन सुबह ज्ञानतीर्थ पर बालाचार्य श्री निपूर्णनन्दी जी महाराज ससंघ का मंगल प्रवेश भी हो रहा है। ज्ञानतीर्थ जैन मंदिर में विराजमान बाल ब्रह्मचारिणी बहिन अनीता दीदी ने बताया कि जैन धर्म में अक्षय तृतीया का बहुत ही महत्त्व है। इस पावन अवसर पर 22 अप्रैल को प्रातः 08 बजे से विभिन्न धार्मिक आयोजनों के साथ-साथ ज्ञानतीर्थ पर विराजमान बड़े वावा श्री आदिनाथ भगवान का महामस्तकाभिषेक किया जाएगा। परम् पूज्य बालाचार्य श्री निपूर्णनन्दी जी महाराज एवं मुनिश्री निर्भयनन्दी जी महाराज का श्री सम्मेदशिखर जी से पदमपुरा के लिए मंगल विहार चल रहा है। शनिवार 22 अप्रैल अक्षय तृतीया को प्रातः 07 बजे पूज्य बालाचार्य जी महाराज का ससंघ मंगल प्रवेश ज्ञानतीर्थ पर होने जा रहा है।
इक्षु रस से किया था भगवान ने पारायण
बहिन अनीता दीदी ने अक्षय तृतीया के संदर्भ में बताया कि अक्षय तृतीया जैन धर्मावलम्बियों का महान धार्मिक पर्व है। इस दिन जैन धर्म के प्रथम तीर्थंकर श्री ऋषभदेव भगवान ने एक वर्ष की पूर्ण तपस्या करने के पश्चात इक्षु (शोरडी-गन्ने) रस से पारायण किया था। जैन धर्म के प्रथम तीर्थकर श्री आदिनाथ भगवान ने सत्य व अहिंसा का प्रचार करने एवं अपने कर्म बंधनों को तोड़ने के लिए संसार के भौतिक एवं पारिवारिक सुखों का त्याग कर जैन वैराग्य अंगीकार कर लिया। सत्य और अहिंसा के प्रचार करते-करते आदिनाथ प्रभु हस्तिनापुर गजपुर पधारे, जहां इनके पौत्र सोमयश का शासन था। प्रभु का आगमन सुनकर सम्पूर्ण नगर दर्शनार्थ उमड़ पड़ा। सोमप्रभु के पुत्र राजकुमार श्रेयांस कुमार ने प्रभु को देखकर उसने आदिनाथ को पहचान लिया और तत्काल शुद्ध आहार के रूप में प्रभु को गन्ने का रस दिया, जिससे आदिनाथ ने व्रत का पारायण किया। जैन धर्मावलंबियों का मानना है कि गन्ने के रस को इक्षुरस भी कहते हैं। इस कारण यह दिन इक्षु तृतीया एवं अक्षय तृतीया के नाम से विख्यात हो गया।













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