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सिद्धचक्र विधान के समापन पर महायज्ञ और भव्य शोभायात्रा : समारोह में विद्वतजनों एवं पात्रों का हुआ बहुमान


श्री पार्श्वनाथ दिगंबर जैन पंचायती बड़ा जैन मंदिर में 8 दिवसीय धार्मिक अनुष्ठान के समापन पर महायज्ञ, हवन एवं श्रीजी की भव्य पालकी शोभायात्रा का आयोजन किया गया। 29 अक्टूबर से 6 नवंबर तक श्री 1008 सिद्धचक्र महामंडल विधान का आयोजन किया गया। सभी इंद्र, इंद्राणियों एवं साधर्मी बंधुओं ने 1024 अर्घ्य समर्पित किए। मुरैना से पढ़िए, मनोज जैन नायक की यह खबर…


मुरैना। नगर के श्री पार्श्वनाथ दिगंबर जैन पंचायती बड़ा जैन मंदिर में 8 दिवसीय धार्मिक अनुष्ठान के समापन पर महायज्ञ, हवन एवं श्रीजी की भव्य पालकी शोभायात्रा का आयोजन किया गया। श्री सिद्धचक्र महामंडल विधान के मुख्य कर्ताधर्ता पंकज जैन मेडिकल ने बताया कि पूर्वाचार्यों के शुभाशीष, प्रतिष्ठाचार्य पंडित महेंद्रकुमार शास्त्री के निर्देशन एवं विधानाचार्य पंडित चक्रेश शास्त्री, नवनीत शास्त्री, संदीप शास्त्री, सतेंद्र शास्त्री, अभिषेक शास्त्री के आचार्यत्व में 29 अक्टूबर से 6 नवंबर तक श्री 1008 सिद्धचक्र महामंडल विधान का आयोजन किया गया। सभी इंद्र, इंद्राणियों एवं साधर्मी बंधुओं ने निरंतर 8 दिन सिद्ध परमेष्ठियों की पूजा भक्ति आराधना करते हुए 1024 अर्घ्य समर्पित किए। विधान में प्रतिदिन प्रातः अभिषेक, शांतिधारा, नित्यमह पूजन, विधान पूजन के साथ साथ शाम को महा आरती, शास्त्र सभा एवं सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन होता था। प्रतिष्ठाचार्य महेन्द्रकुमार शास्त्री ने बताया कि श्री सिद्धचक्र महामंडल विधान को विधानों का राजा कहा जाता है। इस विधान में अनेकों विधान समाहित है। प्रत्येक जैन साधर्मी बंधु को अपने जीवनकाल में एकबार अवश्य ही इस विधान को करना चाहिए। इस विधान को करने से सभी प्रकार के पापों का क्षय होता है एवं लौकिक और अलौकिक सुखों की प्राप्ति होती है। इस तरह के धार्मिक अनुष्ठान करने से पुण्य का संचय होता है और पुण्य से मोक्ष मार्ग प्रशस्त होता है।

विश्व कल्याण एवं शांति के लिए हुआ महायज्ञ

विधान के अंतिम दिन सभी भक्तों ने विश्व कल्याण एवं शांति की कामना के साथ महायज्ञ का आयोजन किया । सभी साधर्मी बंधुओं ने प्रतिष्ठाचार्य एवं विधानाचार्यों द्वारा उच्चारित विशेष मंत्रों के साथ हवन कुण्ड में सुगंधित धूप, देशी घी एवं अन्य शुद्ध वस्तुओं की आहुति दी। हवन कुंड में आहुति के समय संपूर्ण मंडप ‘स्वाहा’ की दिव्य ध्वनि से गुंजायमान हो उठा। चारों ओर सुगंध एवं भक्तिमय वातावरण दिखाई दिया। महायज्ञ में आहुति देने वाले सभी बंधु विश्व शांति एवं विश्व कल्याण हेतु जिनेन्द्र प्रभु से प्रार्थना कर रहे थे।

श्री जिनेंद्र प्रभु की निकली भव्य शोभायात्रा

आठ दिवसीय श्री सिद्धचक्र महामंडल विधान के समापन पर श्री जिनेंद्र प्रभु की भव्य शोभा यात्रा निकाली गई। श्री जिनेंद्र प्रभु को चांदी की पालकी में विराजमान कर हार मुकुट एवं विशेष परिधान में सुसज्जित इंद्रों द्वारा कंधों पर रखकर नगर भ्रमण कराया गया। भव्य पालकी शोभायात्रा बड़े जैन मंदिर से प्रारंभ होकर शंकर बाजार, महादेव नाका, स्टेशन रोड, हनुमान चौराहा, झंडा चौक, सराफा बाजार, लोहिया बाजार होती हुई बड़े जैन मंदिर पहुंची। जैन मंदिर के विशाल मंडप में श्रीजी की प्रतिमा को पांडुक शिला पर विराजमान कर जलाभिषेक किए गए। कलशों के माध्यम से जैसे ही जलधारा प्रभु के सिर पर आई, वैसे ही तालियों की गड़गड़ाहट के साथ संपूर्ण पंडाल जय जय कार करने लगा। बैंडबाजों के साथ निकली श्रीजी की शोभायात्रा में महिलाएं श्री जिनेंद्र प्रभु की स्तुति एवं भजन गायन कर रहीं थीं, पुरुष वर्ग जैन भजनों पर भक्ति नृत्य के साथ अपनी खुशी का इजहार कर रहे थे। स्थान स्थान पर साधर्मी बंधुओं ने जिनेंद्र प्रभु की आरती कर शोभायात्रा की भव्य अगवानी की।

विद्वतजनों एवं पात्रों का हुआ सम्मान

इस पावन अवसर पर श्री सिद्धचक्र महामंडल विधान को विधिविधान एवं मंत्रोच्चारण के साथ सम्पन्न कराने वाले प्रतिष्ठाचार्य पंडित महेन्द्रकुमार शास्त्री पूर्व प्राचार्य, विधानाचार्य पंडित चक्रेश शास्त्री, संदीप शास्त्री, सतेंद्र शास्त्री, अभिषेक शास्त्री का बहुमान किया गया। विधान में पात्र स्वरूप बैठने वाले पंकज संगीता जैन (मेडिकल वाले), पंकज ज्योति जैन (किराना), विमल संगीता जैन (पलपुरा), नेमीचंद ममता जैन (ट्रांसपोर्ट) सहित अन्य लोगों का भी बहुमान किया गया।

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