1300 वर्ष पुरानी जैन धार्मिक परंपरा से जुड़ी माधुरी हथिनी के स्थानांतरण के विरोध में भिंड सकल जैन समाज ने कलेक्टर को ज्ञापन सौंपा। समुदाय ने शांतिपूर्ण और कानूनी उपायों से हथिनी को मठ में पुनः लाने का आह्वान किया है। पढ़िए सोनल जैन की पूरी रिपोर्ट…
1300 वर्षों से धार्मिक परंपराओं का संरक्षण कर रहे कोल्हापुर स्थित जैन मठ में माधुरी नामक हथिनी वर्षों से भक्ति, धार्मिक कार्यक्रमों और पूजा विधान का अभिन्न हिस्सा रही है। स्वस्तिश्री जिनसेन भट्टारक पट्टाचार्य महास्वामीजी के सान्निध्य में संचालित इस मठ में हथिनी को धार्मिक प्रमाणपत्र प्राप्त था। गणेश चतुर्थी, पंचकल्याण पूजा जैसे आयोजनों में उसकी उपस्थिति परंपरा रही है।
हाल ही में PETA द्वारा पुनर्वास की मांग और उच्चाधिकार प्राप्त समिति (HPC) की रिपोर्ट के अनुसार हथिनी को जामनगर के राधे कृष्ण मंदिर ट्रस्ट में भेजने का निर्णय लिया गया। मठ ने इस स्थानांतरण का लगातार विरोध किया और हाई कोर्ट तथा सुप्रीम कोर्ट तक कानूनी प्रयास किए, लेकिन 28 जुलाई 2025 को सर्वोच्च न्यायालय ने याचिका खारिज कर दी।
आक्रोश जताते हुए कलेक्टर को ज्ञापन सौंपा
इस निर्णय के विरुद्ध भिंड सकल जैन समाज ने आक्रोश जताते हुए कलेक्टर को ज्ञापन सौंपा। समाज के अनुसार यह हथिनी भगवान अजितनाथ का प्रतीक होने के साथ ही तीर्थ परंपरा की आत्मा है। स्थानांतरण ने भावनात्मक और धार्मिक आघात पहुँचाया है। भक्ति में रची-बसी इस हथिनी के बिना पंचकल्याणक, जुलूस, सामाजिक आयोजनों की पवित्रता प्रभावित होगी। मनोज जैन पार्षद, विपुल जैन कंप्यूटर, नीरज जैन पुजारी, ऋषभ जैन, विवेक मोदी, अंकित, विशाल, वैभव, निखिल, राहुल जैन सहित अनेक भक्तों ने ज्ञापन में हथिनी को वापस लाने हेतु शांतिपूर्ण कानूनी प्रयासों की घोषणा की।
समाज ने अपील की है कि धार्मिक प्रतीकों की गरिमा और परंपराओं की रक्षा हेतु सरकार हस्तक्षेप करे और माधुरी को मठ में पुनः वापस लाया जाए। यह न केवल आस्था की बात है, बल्कि भारत की धार्मिक विविधता और संरक्षण की भावना की भी परीक्षा है।













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