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भारत में 7 सितंबर को दिखाई देगा चंद्रग्रहण : विभिन्न राशियों पर होगा अलग-अलग प्रभाव 


भारत में रविवार 7 सितंबर को चंद्र ग्रहण होगा। इस दौरान बर्षा होने की भी संभावना है। इस चंद्र ग्रहण से विभिन्न राशियों पर भी अलग-अलग असर दिखाई देगा। इस संवत् 2082 का पहला खंडग्रास चंद्रग्रहण भारत में दिखेगा। मुरैना से पढ़िए, मनोज जैन नायक की यह खबर…


मुरैना। भारत में रविवार 7 सितंबर को चंद्र ग्रहण होगा। इस दौरान बर्षा होने की भी संभावना है। इस चंद्र ग्रहण से विभिन्न राशियों पर भी अलग-अलग असर दिखाई देगा। इस संवत् 2082 का पहला खंडग्रास चंद्रग्रहण भारत में दिखेगा। वरिष्ठ ज्योतिषाचार्य डॉ.हुकुमचंद जैन ने बताया कि भाद्रपद माह की पूर्णिमा तिथि रविवार 7 सितंबर को आ रही है। इस दिन चंद्रग्रहण खग्रास रूप में भारत में दिखेगा। इसके अलावा एशिया, आस्ट्रेलिया, अफ्रीका, यूरोप, नेपाल, भूटान, श्रीलंका, बांग्लादेश, पाकिस्तान, ईरान, इराक, तुर्की, जापान, कोरिया, थाईलैंड और मलेशिया भी इसे देखा जा सकेगा। यह ग्रहण 7 सितंबर को लगेगा और 8 सितंबर की आधी रात तक चलेगा। भारतीय समयानुसार यह ग्रहण 7 सितंबर रविवार को रात 9 बजकर 57 मिनट पर शुरू होगा और रात 1 बजकर 26 मिनट पर समाप्त होगा। इस ग्रहण की अवधि 3 घंटे 29 मिनट है। यह ग्रहण पूर्ण चंद्रग्रहण होगा। इस ग्रहण के दौरान चंद्रमा पूरी तरह धरती की छाया में आ जाएगा। तब इसका रंग लाल हो जाएगा तो इसे ब्लडमून भी कहेंगे।

ग्रहण का सूतक काल 

ग्रहण का सूतक काल 7 सितंबर को दिन के दोपहर 12.57 बजे से प्रारंभ होगा। जैन ने बताया ग्रहण के दिन सूतक में पूर्णिमा का श्राद्ध किए जा सकेगा । किंतु अपक्वान्न का ही दान करना चाहिए।

ग्रहण का राशियों पर प्रभाव

मेष राशि वाले लोगों को लाभ, वृष राशि वाले लोगों को सुख, मिथुन राशि वाले लोगों को मानहानि, कर्क राशि वाले लोगों को कष्ट, सिंह राशि वाले लोगों को स्त्री पीड़ा, कन्या राशि वाले लोगों को सुख, तुला राशि वाले लोगों को चिंता, वृश्चिक राशि वाले लोगों को पीड़ा, धनु राशि वाले लोगों को लक्ष्मी प्राप्ति, मकर राशि वाले लोगों को हानि, कुंभ राशि वाले लोगों को कष्ट, मीन राशि वाले लोगों को हानि हो सकती है।

चंद्रग्रहण के अन्य अन्य प्रभाव

भाद्रपद माह में चन्द्र ग्रहण होने से वर्षा से और अधिक बाढ़ से जन-धन की हानि की आशंका, अनाजों में मंदी, तिल, सरसों, तेल, अरंडी, घी, लोहा में तेजी बनेगी एवं पश्चिम देश के पर्वतवासी पीड़ित होते हैं। राज नेता आपस में उलझते और झगड़ते रहंेगे।

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