प्रतिदिन आचार्य वर्धमान सागर जी महाराज एवं अन्य साधुओं के प्रवचन प्रातः 8:00 आचार्य श्री शांति सागर सभागार पांडाल में किए जा रहे हैं तथा सायं कालीन आरती शाम 6:30 बजे की जा रही है। आचार्य श्री ने पिता के वचनों का सम्मान, पत्नी और भाई के कर्तव्य की विवेचना की। पढ़िए राजेश पंचोलिया की रिपोर्ट..
उदयपुर। वात्सल्य वारिधि आचार्य श्री वर्धमान सागर जी ने केशव नगर की धर्म सभा में बताया कि पिता के वचनों का सम्मान किस प्रकार से होता है, पत्नी का, भाई का कर्तव्य किस प्रकार होता है। आचार्य श्री ने प्रवचन में इनकी विवेचना की। आचार्य श्री ने बताया कि श्री राम ने पिता श्री दशरथ जी द्वारा केकई जी को दिए गए वचनों की लाज रखने के लिए 14 वर्ष के वनवास को स्वीकार करके राजपाट त्याग दिया। श्री राम प्रभु चाहते तो राज्य में निकट में रह सकते थे किंतु उन्हें भाई भरत की भक्ति और प्रेम का एहसास था। उन्होंने सोचा कि अगर मैं राज्य में रहूंगा तो राज्य की जनता भरत को राजा नहीं मानेगी और भरत को राज्य के संचालन में असुविधा होगी। इसलिए देश के अनेक जंगलों में गमन करते रहे। आचार्य श्री ने कहा कि वनवास सिर्फ श्री राम प्रभु को मिला था, सीता जी और लक्ष्मण जी को वनवास नहीं दिया था। किंतु पत्नी का प्रेम इतना अटूट था कि उन्होंने भी महारानी का पद छोड़कर राजपाट- महलों की सुख सुविधा से दूर होकर पति के साथ रहना स्वीकार किया। इसी प्रकार भाई लक्ष्मण जी भी भाई के प्रेम की अटूट सीमा तक जाते हुए श्री राम प्रभु के साथ वन में गए। भरत जी ने भी अपने भाई श्री राम प्रभु के प्रति प्रेम बताया और वह राज्य में सिंहासन पर कभी नहीं बैठे।

राग और द्वेष करते हैं आत्मा का अहित
आचार्य वर्धमान सागर जी संघस्थ शिष्य मुनि श्री प्रशम सागर महाराज ने आचार्य श्री शांति सागर सभागार पांडाल में अपने प्रवचन में कहा कि जीव अनादिकाल से संसार में भ्रमण कर रहा है। जब इस जीव को भगवान की देशना मिली फिर जाकर मोक्ष मार्ग पर जाने की जीव इच्छा करता है, परंतु कुछ ही जीव मोक्ष मार्ग पर जाने का की इच्छा करते हैं। आत्मा का अहित विषय ,राग और द्वेष से होता है, जब तक इंद्रिय विषयों पर काबू नहीं करते हैं तब तक राग और द्वेष होता है । विषयों के प्रति राग नरक की ओर ले जाता है तथा देव शास्त्र गुरु के प्रति राग मोक्ष की ओर ले जाता है।
इन्हें मिला सौभाग्य
दशा नरसिंहपुरा चैरिटेबल ट्रस्ट केशव नगर आदिनाथ दिगंबर मंदिर के अध्यक्ष धनपाल जेतावत एवं आयड़ मंदिर चैरिटेबल ट्रस्ट के अध्यक्ष खूबी लाल चित्तौड़ा और प्रो. देवेंद्र बोहरा ने बताया कि आज आचार्य वर्धमान सागर जी महाराज के पाद प्रक्षालन, शास्त्र दान, दीप प्रज्वलन एवं चित्र अनावरण आदि डॉ. प्रद्मुन जैन परिवार द्वारा किया गया। ट्रस्ट के मंत्री कुंथु कुमार गणपतोत ने बताया कि प्रतिदिन आचार्य वर्धमान सागर जी महाराज एवं अन्य साधुओं के प्रवचन प्रातः 8:00 आचार्य श्री शांति सागर सभागार पांडाल में किए जा रहे हैं तथा सायं कालीन आरती शाम 6:30 बजे की जा रही है।













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