दिगम्बर जैन मंदिर जी में व बिखरोन्न जैन मंदिर में श्रावण सुदी सप्तमी के अवसर पर 23वें तीर्थंकर भगवान श्री पार्श्वनाथ जी का मोक्षकल्याणक भक्तिभाव से मनाया गया। श्री पार्श्वनाथ जी भगवान की प्रतिमा को भक्त जनों ने अपने मस्तक पर धारण कर उनको समारोह पूर्वक चांदी के थाल पर पांडुक शिला पर विराजित किया। पढ़िए दीपक प्रधान की रिपोर्ट
धामनोद। दिगम्बर जैन मंदिर जी में व बिखरोन्न जैन मंदिर में श्रावण सुदी सप्तमी के अवसर पर 23वें तीर्थंकर भगवान श्री पार्श्वनाथ जी का मोक्षकल्याणक भक्तिभाव से मनाया गया। श्री पार्श्वनाथ जी भगवान की प्रतिमा को भक्त जनों ने अपने मस्तक पर धारण कर उनको समारोह पूर्वक चांदी के थाल पर पांडुक शिला पर विराजित किया। मंत्रोचार से स्वर्ण कलश व चांदी के रजत कलशों की बोली लगाई गई। स्वर्ण कलश धामनोद में अजय जैन, बिखरोन्न में मुकेश जैन, विनय जैन व नितिन जैन ने लिया। रजत कलश से प्रभुजी के मस्तक पर शांतिधारा करने का सौभाग्य सुनील धनोते व बिखरोन्न में पीयूष नरेंद्र जैन, धैर्य, धीरेन्द्र जैन को मिला। इस दौरान शांतिधारा मीना दीपक प्रधान के मुखारविंद से बोली गई। इस दौरान श्री पार्श्वनाथ प्रभुजी जो सम्मेदशिखजी से ध्यान लीन होकर मोक्ष गए।
ऐसी भावना उपस्थित सभी श्रावकों व श्राविकाओं ने भावना भाकर सामूहिक निर्माण कांड बोलकर कुएं के जल से उसको प्रासुक जल बनाकर भगवान का स्मरण कर लाडू का निर्माण कर के मन्दिर जी में वीरप्रभु जी के चरणों में चढ़ाया और प्रभुजी से भावना भी भायी कि हमको भी जीवन मरण से छुड़ाकर आपके श्रीचरणों में स्थान दें।
अध्य्क्ष महेश जैन व सचिव दीपक प्रधान ने बताया कि धामनोद व बिखरोन्न मन्दिर में भव्य सजावट कर विद्युत रोशनी भी की। शाम को आरती व भक्तामर आराधना पूर्णिमा नरेंद्र जैन की ओर से की गई। बहुत सारी महिलाओं व कन्याओं के उपवास भी रखे।













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