कोसमा कस्बे की जहां पर 3 हजार के आसपास की आबादी है। जिनमें कुशवाह बघेल ओबीसी समाज के लोग रहते हैं। ये उत्तरप्रदेश के जिला एटा के अंतर्गत कोसमा कस्बा आता है। सबसे बड़ी और महान आश्चर्य की बात यह है कि यहां पर एक भी जैन समाज का घर नहीं है। यहां भगवान 1008 नेमिनाथ भगवान का प्राचीन जैन मंदिर है। कोसमा से पढ़िए, पारस जैन पार्श्वमणि की यह रिपोर्ट…
कोसमा (एटा)। सुप्रसिद्ध भजन गायक रविंद्र जैन का गाया हुआ वो भजन ‘कहा मिलेंगे हमें विमल पद कलम सर्व दुःख हारा उन्हें मृत्यु ने, हमें मृत्यु के समाचार ने मारा’ मुझे याद आता है। जिस भी जैन बंधु ने ये भजन नहीं सुना हो वो एक बार जरूर सुने। जी हां मैं बात कर रहा हूं। उस छोटे से कोसमा कस्बे की जहां पर 3 हजार के आसपास की आबादी है। जिनमें कुशवाह बघेल ओबीसी समाज के लोग रहते हैं। ये उत्तरप्रदेश के जिला एटा के अंतर्गत कोसमा कस्बा आता है। सबसे बड़ी और महान आश्चर्य की बात यह है कि यहां पर एक भी जैन समाज का घर नहीं है। यहां भगवान 1008 नेमिनाथ भगवान का प्राचीन जैन मंदिर है। इस मंदिर में एक छोटी बेदी पर भव्य अतिशय युक्त छोटी सी मनोहारी प्रतिमा भगवान नेमिनाथ की विराजमान है। उसी के दो फलांग दूरी पर एक मंदिर, जिसमें वात्सल्य मूर्ति आचार्य श्री विमल सागर जी महाराज की मूर्ति स्मारक स्वरूप, दूसरी ओर हनुमान जी की मूर्ति, शिव पार्वती लिंग भी विजातीय लोगांे ने स्थापित किया है।
ये सर्व धर्म समभाव का उदाहरण कहा जा सकता है। यहां प्रतिदिन कस्बे के लोगों और महिलाओं की ओर से सायंकाल भक्ति भाव से भजन एवं चालीसा करते देखा जा सकता है। मां अम्बा जी की मूर्ति भी विराजमान है। आचार्य श्री विमल सागर जी महाराज की आरती भी लिखी हुई है। लोग अपनी बाधाएं दूर करने के लिए आरती करते हैं। लोगों में आचार्य श्री के प्रति अटूट आस्था और विश्वास है। इस मंदिर का शिलान्यास आचार्य श्री चैत्य सागर जी महाराज के पावन सानिध्य में आरके जैन बॉम्बे ने किया है। आचार्यश्री चैत्यसागर जी महाराज का वर्षायोग आगरा में हर्षाैल्लास के वातावरण में चल रहा है।
उन्हीं की मंगल प्रेरणा और निर्देशन में कोसमा कस्बे में आचार्यश्री विमल सागर जी महाराज की स्मृति में भव्य मंदिर का कार्य द्रुत गति से चल रहा है। नवंबर महीने में पंच कल्याणक प्रतिष्ठा महोत्सव भी प्रस्तावित है। कोसमा में मंदिर के पास ही एक बड़ी चार मंजिला धर्मशाला उपलब्ध है। एक सर्व सुविधायुक्त चिकित्सालय जिसमें प्रतिदिन 300 मरीज अपने इलाज के लिए आते हैं। आधुनिक मशीनों द्वारा जटिल ऑपरेशन सुविधा भी उपलब्ध है। 40 से अधिक दक्ष चिकित्सक टीम मरीजों के इलाज ओर सेवा में रहती है। बहुत ही कम खर्च में समस्त सुविधाएं प्रदान की जाती है। अभा जैन संपादक संघ के तत्वाधान में अखिल बंसल के नेतृत्व में इसका निरीक्षण करने का परम सौभाग्य मुझे मिला।
यह देखकर मेरा मन आचार्यश्री विमल सागर की महाराज के प्रति श्रद्धा से भर गया। उनकी याद में आंखें भर आई। गाड़ी में वही भजन कहा मिलेंगे। हमें विमल पद कमल सर्व दुख हारा भजन श्रद्धा भक्ति भाव पूर्वक सुनाया। समस्त जैन समाज से मेरा आत्मीय अनुरोध है कि इस परम पुनीत कार्य के लिए आगे आए। जैन समाज में धार्मिक आयोजन बढचढ़ कर प्रति वर्ष होते हैं। जिनमें करोड़ों की राशि लगाई जाती है। अब शिक्षा और चिकित्सा पर जैन समाज को ध्यान देना चाहिए। चिंतामणि रत्न समान दुर्लभ मानव जैन पर्याय में एक बार अवश्य कोसमा धर्मप्राण कस्बे में अवश्य पधारकर दर्शन लाभ लें।













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