समाचार

भगवान महावीर का गर्भ कल्याणक महोत्सव 1 जुलाई को: तिथि के अनुसार आषाढ़ शुक्ज षष्ठी को मनाया जाएगा


भगवान महावीर स्वामी का गर्भ कल्याणक एक जुलाई को मनाया जाएगा। जिनालयों में 24वें तीर्थंकर भगवान महावीर स्वामी के गर्भ कल्याण दिवस पर महावीर स्वामी की अष्टद्रव्य से पूजा-अर्चना करके अभिषेक होंगे। सुख समृद्धि एवं शांति की कामना करते हुए शांतिधारा तथा गर्भ कल्याणक का अर्घ्य भी चढ़ाया जाए तिथि के अनुसार यह महोत्सव आषाढ़ शुक्ल षष्ठी के दिन मनाया जाएगा। श्रीफल जैन न्यूज के पाठकों के लिए यह विशेष जानकारी उपसंपादक प्रीतम लखवाल द्वारा यहां साझा की जा रही है।


इंदौर। जैन धर्मावलंबियों द्वारा 24वें तीर्थंकर भगवान महावीर स्वामी के गर्भ कल्याण दिवस पर महावीर स्वामी की अष्टद्रव्य से पूजा-अर्चना करके अभिषेक किया जाएगा। सभी सुख समृद्धि एवं शांति की मंगलमयी कामना करते हुए शांतिधारा तथा गर्भ कल्याणक का अर्घ्य भी चढ़ाया जाएगा। भगवान महावीर के गर्भ कल्याणक दिवस इस बार एक जुलाई को आ रहा है। तिथि के अनुसार यह महोत्सव आषाढ़ शुक्ल षष्ठी के दिन मनाया जाएगा। धर्म ग्रंथों में वर्णित जानकारी के अनुसार भगवान महावीर के जन्म से पूर्व एक बार महारानी त्रिशला नगर में हो रही अद्भुत रत्न वर्षा के बारे में सोच रही थीं। यह सोेचते-सोचते वे गहरी नींद में सो गईं।

उसी रात को अंतिम प्रहर में महारानी ने सोलह शुभ मंगलकारी स्वप्न देखे। वह आषाढ़ शुक्ल षष्ठी का दिन था। रानी त्रिशला ने गर्भ स्थिति में यह मंगलकारी शुभ स्वप्न देखे थे। सुबह जागने पर रानी के महाराज सिद्धार्थ से अपने स्वप्नों की चर्चा की और उसका फल जानने की इच्छा प्रकट की। राजा सिद्धार्थ कुशल राजनीतिश्र के साथ्ज्ञ ज्योतिष शास्त्र के भी विद्वान थे। उन्होंने रानी से कहा कि एक-एक कर अपना स्वप्न बताएं। वे उसी प्रकार उसका फल बताते चलेंगे। तब महारानी त्रिशला ने अपने सारे स्वप्न् उन्हें एक-एक कर विस्तार से सुनाए।

आइए जानते हैं महारानी ने कौन से 16 स्वप्न देखे

रानी ने पहले स्वप्न के बारे में बताया कि एक अति विशाल श्वेत हाथी दिखाई दिया। राजा सिद्धार्थ ने इसका फल बताते हुए कहा कि उनके घर एक अद्भुत पुत्र-रत्न उत्पन्न होगा। रानी ने दूसरे स्वप्न के बारे में बताया कि श्वेत वृषभ दिखाई दिया। राजा ने बताया कि वह पुत्र जगत का कल्याण करने वाला होगा। तीसरे स्वप्न के बारे में जब रानी ने बताया कि श्वेत वर्ण और लाल अयालों वाला सिंह दिखा तो राजा ने इसका फल बताया कि वह पुत्र सिंह के सामन बलशाली होगा। चौथे स्वप्न में रानी ने देखा कि कमलासन लक्ष्मी का अभिषेक करते हुए दो हाथी भी दिखे। इसका फल बताया गया कि देवलोक से देवगण आकर उस पुत्र का अभिषेक करेंगे। पांचवे स्वप्न में रानी ने दो सुगंधित पुष्पमालाएं देखीं। राजा ने उनको बताया कि वह पुत्र धर्म तीर्थ स्थापित करेगा और जन-जन द्वारा पूजित होगा। छठे स्वप्न में पूर्ण चंद्रमा नजर आया तो उसके फल के बारे में बताया गया कि उसके जन्म से तीनों लोक आनंदित होंगे।

सातवें स्वप्न में उदय होता सूर्य नजर आया तो उन्हें बताया गया कि वह पुत्र सूर्य के समान तेजयुक्त और पापी प्राणियों का उद्धार करने वाला होगा। आठवें स्वप्न में कमल पत्रों से ढंके दो स्वर्ण कलश थे तो इस बारे में राजा ने बताया कि वह पुत्र अनेक निधियों का स्वामी निधिपति होगा। नौवें स्वप्न में कमल सरोवर में क्रीड़ा करती दो मछलियां दिखी। इसके बारे में यह फल बताया कि वह पुत्र महा आनंद दाता और दुःख हर्ता होगा। 10वें स्वप्न में रानी ने कमलों से भरा जलाशय देखा तो राजा ने उन्हें बताया कि 1008 शुभ लक्षणों से युक्त पुत्र प्राप्त होगा। 11वंे स्वप्न का जिक्र करते हुए रानी ने कहा कि लहरें उछालता समुद्र दिखा। राजा ने उन्हें बताया कि भूत-भविष्य और वर्तमान का ज्ञाता केवली पुत्र होगा। 12वंे स्वप्न में हीरे-मोती और रत्न जड़ित सिंहासन देखा। इस बारे में बताया गया कि आपका पुत्र राज्य का स्वामी और प्रजा का हित चिंतक रहेगा। 13वें स्वप्न में स्वर्ग का विमान देखा गया। इसके बारे में इस जन्म से पूर्व वह पुत्र स्वर्ग में देवता होगा। चौदहवें स्वप्न में रानी ने पृथ्वी को भेदकर निकलता नागों के राजा नागेंद्र का विमान देखा तो राजा ने बताया कि वह पुत्र जन्म से ही त्रिकालदर्शी होगा। 15 स्वप्न में रानी ने रत्नों का ढेर देखा।

राजा ने उन्हें बताया कि वह पुत्र अनंत गुणों से संपन्न होगा। सोलहवें स्वप्न में रानी ने धुआ रहित अग्निी देखी। इस पर राजा सिद्धार्थ ने उन्हें बताया कि वह पुत्र सांसारिक कर्मों का अंत करके मोक्ष को प्राप्त होगा। इन स्वप्नों के साथ ही भगवान महावीर ने रानी त्रिशला के गर्भ में प्रवेश किया और कालांतर तक उनकी कीर्ति हुई। जैन धर्म के 24वें तीर्थंकर के रूप में पूरे जगत में पूजित हुए। आज भी जैन धर्मावलंबी भगवान महावीर जी की पूर्ण भक्ति भावना से पूजा, अर्चना और अभिषेक आदि विधान करते हैं।

आप को यह कंटेंट कैसा लगा अपनी प्रतिक्रिया जरूर दे।
+1
0
+1
0
+1
0
Shreephal Jain News

About the author

Shreephal Jain News

Add Comment

Click here to post a comment

You cannot copy content of this page