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भगवान धर्मनाथ जी का ज्ञान कल्याणक 3 जनवरी को : पौष शुक्ल पूर्णिमा को तिथि अनुसार मनाया जाता है


जैन धर्म के तीर्थंकरों की परंपरा के 15वें तीर्थंकर भगवान धर्मनाथ जी का ज्ञान कल्याण पूर्ण श्रद्धा और भक्ति के साथ 3 जनवरी को पौष शुक्ल पूर्णिमा के दिन मनाया जाएगा। इस दिन दिगंबर जैन मंदिरों में विशेष आराधना, पूजन और अभिषेक, अर्घ्य आदि विधान किए जाएंगे। श्रीफल जैन न्यूज की विशेष श्रृंखला में उपसंपादक प्रीतम लखवाल की संकलित और संयोजित यह प्रस्तुति पढ़िए…


इंदौर। जैन धर्म के तीर्थंकरों की परंपरा के 15वें तीर्थंकर भगवान धर्मनाथ जी का ज्ञान कल्याण पूर्ण श्रद्धा और भक्ति के साथ 3 जनवरी को पौष शुक्ल पूर्णिमा के दिन मनाया जाएगा। इस दिन दिगंबर जैन मंदिरों में विशेष आराधना, पूजन और अभिषेक, अर्घ्य आदि विधान किए जाएंगे। जैन ग्रंथ के अनुसार भगवान धर्मनाथ जी का ज्ञान कल्याणक जैन धर्म के 15वें तीर्थंकर भगवान धर्मनाथ जी द्वारा केवलज्ञान (सर्वाेच्च ज्ञान) प्राप्त करने का शुभ अवसर है, जो उन्हें पौष शुक्ल पूर्णिमा, दधिपर्ण वृक्ष के नीचे रत्नपुर (आज के रोनाही, अयोध्या) में प्राप्त हुआ। जिसके बाद उन्होंने समवशरण में अपने प्रथम धर्माेपदेश से लाखों लोगों को मुक्ति मार्ग दिखाया और चार तीर्थों की स्थापना की। जैन धर्म में चार प्रमुख कल्याणक होते हैं गर्भ, जन्म, तप और ज्ञान कल्याणक, जो तीर्थंकर के जीवन की महत्वपूर्ण घटनाएं हैं और मोक्ष कल्याणक (निर्वाण)। भगवान धर्मनाथ जी के कैवल्य ज्ञान प्राप्ति रत्नपुर (रोहाना/रोनाही, अयोध्या, उत्तर प्रदेश) में दधिपर्ण (या दीर्घ पूण) वृक्ष के नीचे हुई थी। ज्ञान प्राप्ति की तिथि पौष शुक्ल पूर्णिमा है। जैन धर्म के ग्रंथों के अनुसार वे पूर्व भव में राजा दृढरथ थे, जिन्होंने घोर तपस्या कर तीर्थंकर नामकर्म अर्जित किया और बाद में इसी भव में धर्मनाथ के रूप में जन्म लिया। केवलज्ञान होते ही देवताओं ने 5 योजन (लगभग 20 हजार हाथ) का समवशरण (दिव्य सभा) रचा।

जहां अरिष्टसेन प्रमुख गणधर के साथ 43 गणधर और लाखों साधु-साध्वी, श्रावक-श्राविकाएं विराजमान हुए। उन्होंने अपने प्रथम उपदेश में वासनाओं और सांसारिक बंधनों के दुष्परिणामों पर प्रकाश डाला और धर्म के मार्ग का उपदेश दिया, जिससे कई जीव धर्म-मोक्ष मार्ग पर अग्रसर हुए। धर्मनाथ जी ने चार तीर्थों (साधु, साध्वी, श्रावक, श्राविका) की स्थापना की। इसीलिए वे तीर्थंकर कहलाए। इस तरह, धर्मनाथ जी का ज्ञान कल्याणक न केवल उनके लिए, बल्कि समस्त प्राणियों के लिए ज्ञान और मुक्ति का मार्ग प्रशस्त करने वाला है।

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