भगवान धर्मनाथ जी का जन्म और तप कल्याणक 30 जनवरी को है। इस दिन दिगंबर जैन मंदिरों में भगवान के अभिषेक और शांतिधारा पूर्ण श्रद्धा और भक्ति के साथ की जा रही है। तिथि के अनुसार जन्म एवं तप कल्याणक माघ द्वादशी /त्रयोदशी को मनाया जाता है। श्रीफल जैन न्यूज की विशेष शृंखला में आज पढ़िए, उपसंपादक प्रीतम लखवाल की यह संकलित प्रस्तुति…
इंदौर। भगवान धर्मनाथ जी जैन धर्म के 15वें तीर्थंकर के रूप में इस जगत में आए और उन्होंने जैन धर्म की ध्वजा, परंपरा और सिद्धांतों को आगे बढ़ाया और सम्यक ज्ञान, सम्यक दर्शन और सम्यक चारित्र सहित अहिंसा, तप और तपस्या का संदेश श्रावक-श्राविकाओं को दिया। इस बार भगवान धर्मनाथ जी का जन्म और तप कल्याणक 30 जनवरी को है। इस दिन दिगंबर जैन मंदिरों में भगवान के अभिषेक और शांतिधारा पूर्ण श्रद्धा और भक्ति के साथ की जा रही है। तिथि के अनुसार जन्म एवं तप कल्याणक माघ द्वादशी /त्रयोदशी को मनाया जाता है। भगवान धर्मनाथ का चिन्ह वज्रदंड है। भगवान के पिता महासेन और माता महादेवी सुव्रता हैं। भगवान का जन्म माघ द्वादशी /त्रयोदशी को रत्नपुर में हुआ। इसी तिथि को भगवान ने दीक्षा प्राप्त कर तपस्या में लीन हो गए। भगवान के शरीर की ऊंचाई 45 धनुष और आयु 10 लाख वर्ष है। सप्तच्छ वृक्ष के नीचे भगवान धर्मनाथ जी ने दीक्षा ली। 1 हजार राजा उनके साथ दीक्षित हुए। भगवान के समवशरण में 43 गणधर, 55 हजार केवली मुनि, 64 हजार मुनि, 62 हजार 400 आर्यिकाएं, दो लाख श्रावक, 4 लाख श्राविकाएं थीं।













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