पंचकल्याणक महामहोत्सव के प्रथम दिवस गर्भ कल्याणक के अवसर पर आयोजित प्रातःकालीन धर्मसभा में निर्यापक श्रमण मुनि श्री संभवसागर महाराज ने कहा कि युग के आदि में भगवान आदिनाथ ने केवल धर्म का उपदेश ही नहीं दिया, बल्कि षट्कर्म का मार्ग बताकर मानव को असी, मसी और कृषि जैसे कर्मों की शिक्षा दी तथा मानव सभ्यता के बीज बोए। पढ़िए यह विशेष रिपोर्ट…
विदिशा। पंचकल्याणक महामहोत्सव के प्रथम दिवस गर्भ कल्याणक के अवसर पर आयोजित प्रातःकालीन धर्मसभा में निर्यापक श्रमण मुनि श्री संभवसागर महाराज ने कहा कि युग के आदि में भगवान आदिनाथ ने केवल धर्म का उपदेश ही नहीं दिया, बल्कि षट्कर्म का मार्ग बताकर मानव को असी, मसी और कृषि जैसे कर्मों की शिक्षा दी तथा मानव सभ्यता के बीज बोए। उन्होंने कहा कि भगवान आदिनाथ के पूर्व कोई भी व्यक्ति धर्म की ए.बी.सी.डी. भी नहीं जानता था। उस समय भगवान ने लोगों को न केवल षट्कर्म की शिक्षा दी, बल्कि धर्म के मार्ग पर चलाकर पाषाण से परमात्मा बनने की कला सिखाई। आज उसी कला को विदिशावासी पंचकल्याणक के माध्यम से निकट से देखेंगे। मुनि श्री ने कहा कि यह भूमि भगवान श्री शीतलनाथ स्वामी की कर्मभूमि भद्दिलपुर है, जहां भगवान गर्भ में आए, यहीं उनका जन्म हुआ तथा यहीं युवा अवस्था में दीक्षा धारण कर कैवल्यज्ञान प्राप्त किया। उन्होंने कहा कि इस विदिशा नगरी को पहले भेलसा और भद्दिलपुर के नाम से जाना जाता था।
भीतर की कलुषता समाप्त हो
उन्होंने कहा कि बाहर से आप लोग बर्रो वाले बाबा के नवीन जिनालय के पंचकल्याणक को देख रहे हैं, लेकिन इसे केवल देखना ही पर्याप्त नहीं है। इसे देखकर हमारे भीतर की कलुषता समाप्त होनी चाहिए, तभी आपका पंचकल्याणक मनाना सार्थक होगा। मुनि श्री ने विदिशावासियों की सराहना करते हुए कहा कि कार्यक्रम के पहले ही दिन पांडाल श्रद्धालुओं से खचाखच भरा हुआ है। उनकी दृष्टि जहां तक जा रही है, वहां तक इंद्र और इंद्राणियां ही नजर आ रही हैं। सामान्य लोगों के लिए तो पांडाल के बाहर ही स्थान खोजना पड़ रहा है। उन्होंने कहा कि प्रभु भक्ति का प्रभाव ही ऐसा है कि व्यक्ति सब कुछ भूल जाता है। मौसम भी अत्यंत अनुकूल है — न अधिक ठंड है और न ही अधिक गर्मी। बच्चों की छुट्टियां भी चल रही हैं, इसलिए सभी को भक्ति में पूरी तरह डूब जाना चाहिए, ताकि वर्ष 2022 में कुंडलपुर में बने इतिहास की तरह यहां भी नया इतिहास बन सके और बर्रो वाले बाबा उसी भक्ति भाव के साथ अपने नए आसन पर विराजमान हों।
आत्मा में भी चारित्र की ध्वजा फहराएं
मुनि श्री ने बताया कि सुबह हुए ध्वजारोहण में ध्वजा पूर्व दिशा अर्थात सूर्य की दिशा में लहराई, जो इस बात का संकेत है कि यह कार्यक्रम अभूतपूर्व होगा। उन्होंने कहा कि यह कार्यक्रम हमारा या तुम्हारा नहीं, बल्कि बर्रो वाले बाबा भगवान आदिनाथ का कार्यक्रम है, जिस पर हमारे आराध्य आचार्य गुरुदेव विद्यासागर जी महाराज तथा आचार्य समयसागर महाराज का आशीर्वाद है। उन्होंने श्रद्धालुओं से आह्वान करते हुए कहा कि बाहरी ध्वजारोहण के साथ अपनी आत्मा में भी चारित्र की ध्वजा फहराएं। आचार्य श्री हमेशा कहा करते थे कि चारित्र की ध्वजा अपने भीतर सदैव फहरती रहनी चाहिए, तभी जीवन में साधुता के भाव बने रहते हैं।
भव्य शोभायात्रा में उमड़ा भक्तों का सैलाब
आयोजन समिति के प्रवक्ता अविनाश जैन ‘विद्यावाणी’ ने बताया कि लगभग 25,200 वर्गफीट क्षेत्रफल में निर्मित डोमाकार पांडाल श्रद्धालुओं से खचाखच भरा हुआ था। प्रातः लगभग 6:30 बजे भगवान की भव्य शोभायात्रा पांच चांदी की पालकियों के साथ प्रारंभ हुई। यात्रा में आगे निर्यापक मुनि श्री संभवसागर महाराज, मुनि श्री निस्सीमसागर महाराज तथा मुनि श्री संस्कारसागर महाराज साथ में चल रहे थे। दिव्य घोष, बैंड-बाजों और भक्तों के भजन-कीर्तन के साथ संपूर्ण वातावरण धर्ममय हो गया। घटयात्रा में सौभाग्यवती महिलाएं पंचकल्याणक की विशेष वेशभूषा में सिर पर कलश धारण कर कतारबद्ध चल रही थीं, वहीं हाथी पर धर्मध्वजा धारण किए सौधर्म इंद्र यात्रा का नेतृत्व कर रहे थे। धर्मयात्रा जैन महाविद्यालय परिसर में निर्मित अयोध्या नगरी पहुंची, जहां प्रतिष्ठाचार्य बाल ब्रह्मचारी विनय भैया एवं तरुण भैया के निर्देशन में ध्वजारोहण एवं मंडप उद्घाटन संपन्न हुआ। इसके पश्चात मंगलाचरण के साथ भगवान का अभिषेक किया गया तथा विश्व में शांति स्थापित हो, इस मंगल भावना के साथ मुनि श्री संभवसागर महाराज के मुखारविंद से शांतिधारा कराई गई। सौभाग्यवती महिलाओं ने अपने कलश के जल से मंडप की शुद्धि की तथा प्रमुख पात्रों की इंद्राणियों द्वारा वेदी शुद्धि की गई। नित्य नियम पूजन के साथ दोपहर में यागमंडल विधान संपन्न हुआ।
संध्याकालीन कार्यक्रम में प्रस्तुत हुए दिव्य दृश्य
सांयकालीन कार्यक्रम में संगीतमय आरती, शास्त्र प्रवचन और सौधर्म इंद्र की सभा का आयोजन हुआ। इसमें माता के 16 स्वप्नों का वर्णन तथा अष्टदेवियों द्वारा माता की सेवा के दिव्य दृश्य प्रस्तुत किए गए और गर्भ कल्याणक की आंतरिक क्रियाओं का मंचन किया गया।
आज होंगे मांगलिक कार्यक्रम और निःशुल्क चिकित्सा शिविर
12 मार्च को प्रातः 6 बजे से मांगलिक क्रियाओं के साथ कार्यक्रम प्रारंभ होगा। इस दौरान गर्भ कल्याणक की पूजा संपन्न की जाएगी। दोपहर 12 बजे से निःशुल्क चिकित्सा शिविर का आयोजन किया जाएगा। साथ ही गर्भवती महिलाओं के लिए ब्रह्मचारिणी दीदी द्वारा गर्भ संस्कार विधि कराई जाएगी। रात्रि में राजा नाभिराय का दरबार लगाया जाएगा, जिसमें धार्मिक मंचन और विशेष आयोजन होंगे।













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