यदि हम सबके दोष देखते रहे तो दुखी ही होंगे और हमारे संबंधी भी परेशान हो जाएंगे। इसलिए गुणों की ओर दृष्टि रखो जिससे आनंद बढ़ता चला जाएगा। ये अमूल्य विचार आर्यिका सुनयमति माताजी ने परिवहन नगर में आयोजित धर्मसभा में व्यक्त किए। पढ़िए यह विशेष रिपोर्ट….
इंदौर। समुद्र में गहराई होती हैं, बादल में उंचाई होती हैं , हर वस्तु में कोई न कोई गुण अवश्य होता हैं, इसके साथ ही उमनें दोष भी होते हैं। व्यवहार में कई व्यक्ति के साथ समायोजन करना होता है, यदि हम सबके दोष देखते रहे तो दुखी ही होंगे और हमारे संबंधी भी परेशान हो जाएंगे। इसलिए गुणों की ओर दृष्टि रखो जिससे आनंद बढ़ता चला जाएगा।
ये अमूल्य विचार आर्यिका सुनयमति माताजी ने परिवहन नगर में आयोजित धर्मसभा में व्यक्त किए। कार्यक्रम का मंगलाचरण कनकलता जैन ने किया। सायंकालीन सत्र में क्षुल्लक सुपर्व सागर जी महाराज द्वारा प्रवचन एवम प्रश्न मंच आयोजन हुआ। मंगल आरती की ज्योति जलाकर श्रावकों ने अपनी भक्ति गुरुचरण में अर्पित की।













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