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भगवान की भक्ति दीपक की भाँति आत्मा के बुझे दीप जला दे: आचार्य श्री विमर्श सागर जी ने धर्मसभा में दी देशना


सराहनपुर में आचार्यश्री विमर्शसागर जी का चातुर्मास होने जा रहा है। यहां उन्होंने धर्मसभा को संबोधित कर समाजजनों को धर्म के बारे में दिशा-दर्शन दिया। सराहनरपुर से पढ़िए, सोनल जैन की यह खबर…


सराहनपुर। संसार में जितने भी जीव हैं। वे सभी धर्मात्मा जीव हैं क्योंकि, प्रत्येक जीव में अनंत धर्म विद्यमान हैं। प्रत्येक आत्म प्रव्य अनंत धर्मात्मक गुणों का चित्पिंड है किन्तु वे सभी गुणधर्म वर्तमान में विभाव रूप से परिणमन कर रहे हैं और जीव अपने ही स्वभाव गुणों से परिचय न करके विभाव गुणों से ही प्रभावित होकर निरंतर दुःख ही दुःखों को भोग रहा है। जब तक आत्मा के शुद्ध स्वभाव एवं वर्तमान विभाव परिणमन की यथार्थता से परिचय कर जीव जिनेन्द्र भगवान द्वारा उपदिष्ट समीचीन मार्ग पर अग्रसर नहीं होता तब तक दुःखों की परंपरा निरंतर बढ़ती ही रहती है। ऐसा सम्यक धर्माेपदेश धर्मनगरी सहारनपुर के जैनबाग स्थित श्री महावीर जिनालय में चल रहे ‘श्री सिद्धचक्र महामंडल विधान के मध्य ‘जीवन है पानी की बूंद’ महाकाव्य के मूल रचनाकार आचार्य श्री विमर्शसागर जी ने उपस्थित धर्मसभा को संबोधित करते हुए दिया।

आचार्य श्री ने बतलाया कि सिद्धों की आराधना करते-करते एक दिन स्वयं हमारी आत्मा भी सिद्ध स्वरूप हो जाती है। सिद्ध भगवानों की आराधना हमें बताती है कि जो गुण सिद्ध परमात्मा में प्रगट हैं वे ही अनंत गुण हम सबकी आत्मा में अप्रगट रूप से विधमान हैं। सिद्ध भगवंतों की आराधना प्रज्वलित दीप की भाँति हमारे आत्मा रूपी बुझे दीप को भी प्रज्वलित कर सिद्ध स्वरूप प्रगट करा देती है। 10 जुलाई से 21 अक्टूबर तक जैन धर्म के अनुसार यह च्यातुमसि का काल कहलाता है, जिसमें दिगम्बर जैन मुनि एक ही स्थान पर ठहरकर अपनी तप-साधना किया करते हैं। वर्ष 2025 में आचार्य श्री विमर्श सागर जी के विशाल चतुर्विध संघ का मंगलमय चातुर्मास कराने का महासौभाग्य सहारनपुर धर्मनगरी को प्राप्त हुआ। 4 माह के दीर्घ कालीन प्रवास में आचार्य संघ की सनिधि में बैठकर समाज एवं नगर के आबाल-वृद्ध अपने जीवन में दिव्य सूत्रों को उपलब्ध कर जीवन को एक नयी दशा एवं दिशा प्रदान कर सकेंगे। पूर्वजों का कहना है कि हम लोगों की याद में भी इतना विशाल चतुर्विध संघ प्रथम बार ही सहारनपुर में आया है। हम सब आचार्य संघ की सेवा-वैयावृत्ति करके अपने जीवन में सौभाग्यों का अवतरण करेंगे।

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