पथरिया में चातुर्मास के दौरान मुनिश्री सर्वार्थ सागर जी महाराज ने कहा कि आज की बेचैनी, भागदौड़ और खर्चीली जीवनशैली हमारे अपने बनाए तरीके हैं- जिंदगी तो हमेशा से सादी, शांत और सरल रही है। उन्होंने कहा कि पहले कम साधनों में भी सुकून था, लेकिन आज सुविधाओं के बाद भी संतोष नहीं। उनके प्रवचन में सादगी और आत्म-मूल्य की सीख दी गई। पढ़िए अभिषेक अशोक पाटिल की विस्तृत खबर…
पथरिया। पथरिया में पट्टाचार्य विशुद्ध सागर जी महाराज के ससंघ चातुर्मास के अंतर्गत आयोजित प्रवचन में उनके शिष्य मुनि सर्वार्थ सागर जी महाराज ने वर्तमान जीवनशैली पर गहरा विचार प्रस्तुत किया। उन्होंने कहा, “जिंदगी महंगी नहीं होती, जिंदगी जीने के तरीके महंगे होते हैं।” यह वक्तव्य जितना सरल है, उतना ही गहरा और आत्ममंथन करने वाला है।
मुनि श्री ने बताया कि आज का मानव अपनी मूलभूत जरूरतों को भूलकर इच्छाओं की अंधी दौड़ में शामिल हो गया है। पहले के समय में कम संसाधनों के बावजूद लोग सुकून से जीवन जीते थे। खाट पर नींद पूरी होती थी, सादा खाना परिवार के साथ मिल बैठकर खाया जाता था और एक रेडियो पूरे परिवार को जोड़ता था। लेकिन आज, जब भौतिक सुविधाएं बहुत अधिक हो गई हैं, तब भी व्यक्ति भीतर से बेचैन है। पांच सितारा होटलों में भी अकेलापन महसूस होता है और लाखों के गद्दों पर भी नींद नहीं आती।
*ज़रूरतों को इच्छाओं में और इच्छाओं को आवश्यकताओं में बदल दिया*
उन्होंने कहा कि समस्याएं बाहर नहीं, भीतर हैं। हमने ज़रूरतों को इच्छाओं में और इच्छाओं को आवश्यकताओं में बदल दिया है। यही कारण है कि साधनों की भरमार के बाद भी जीवन में संतोष नहीं है। सूरज आज भी वैसा ही उगता है, चाँद भी वैसा ही चमकता है, लेकिन हमारी दृष्टि और सोच बदल गई है। इस प्रवचन में उन्होंने विशेष रूप से युवा पीढ़ी को सादगी और संतुलन की राह पर चलने की प्रेरणा दी। उन्होंने बताया कि अगर हम अपने जीने का तरीका सहज, संयमित और प्राकृतिक रखें, तो न केवल मानसिक शांति मिलती है, बल्कि आध्यात्मिक उन्नति का मार्ग भी प्रशस्त होता है।
*बड़ी संख्या में उमड़े श्रद्धालु*
चातुर्मास प्रवचन के आयोजन में बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे। इस आयोजन की जानकारी अखिल भारतवर्षीय दिगंबर जैन युवा परिषद कोल्हापुर के कार्याध्यक्ष अभिषेक अशोक पाटील ने दी। चातुर्मास के अंतर्गत प्रतिदिन प्रवचन, आरती, भक्ति और धार्मिक आयोजन हो रहे हैं, जिससे समाज में आत्मिक जागृति का वातावरण बन रहा है।













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