आचार्य विद्यासागर महाराज के समाधिमरण की सूचना पर संपूर्ण जैन समाज सहित देशभर में उनके अनुयायी शोक की लहर में हैं। श्रद्धालु उन्हें अपने शब्दों से भावों से याद कर रहे हैं. इसी कर्म में आपके सामने है डॉ. इन्दु जैन का संस्मरण।
संत शिरोमणि,भारत गौरव,अनेक भाषाओं के ज्ञाता, परम ज्ञानी,परम तपस्वी आचार्य श्री 108 विद्यासागर जी महाराज के प्रत्यक्ष दर्शन, चर्चा, आशीर्वाद ,उनकी धर्म सभा में मंगलाचरण करना परम सौभाग्य होता है और मैं उन सभी सौभाग्यशालियों में से एक हूं जिन्हें यह परम अवसर कई बार प्राप्त हुआ । नवीन संसद भवन के भूमि पूजन में जैनधर्म का प्रतिनिधित्व करने के कुछ समय बाद जब पिताजी (प्रो.फूलचंद जैन प्रेमी, वाराणसी) के साथ आचार्य श्री के दर्शन करने के लिए गए , तो आचार्य श्री के कक्ष में जाकर प्रत्यक्ष दर्शन का हमें सौभाग्य मिला । गुरुवर ने जैन प्रार्थना की प्रस्तुति के लिए अत्यंत प्रसन्नता अभिव्यक्त करते हुए, मुझे आत्मीयतापूर्ण आशीर्वाद दिया । आशीर्वाद स्वरूप उनके वचन सदैव मेरा मार्गदर्शन करते हैं । जब नवीन संसद भवन के उद्घाटन समारोह में भी जैनधर्म की प्रार्थना प्रस्तुत की तथा अनेक राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय आयोजनों में जैनधर्म के प्रतिनिधित्व और प्रभावना करने का अवसर मिला तो अपने जीवन में आचार्य श्री के आशीर्वाद को फलीभूत होते मैंने प्रत्यक्ष महसूस किया । वास्तव में हम सभी पुण्यशाली हैं कि हम सभी ने आचार्य श्री के रूप में वर्तमान में धरती के भगवान को देखा है । नेमावर, कुण्डलपुर आदि तीर्थ स्थलों पर वर्तमान के वर्धमान,संत शिरोमणि आचार्य 108 श्री विद्यासागर जी के मुखारविंद से आशीर्वाद मिलना,कुंडलपुर में उनके सानिध्य में हुए विद्वत् समागम में प्रतिभागिता करना और उनके समवशरण रूपी धर्मसभा का मंगलाचरण करना, ये सभी ऐसे अविस्मरणीय गौरवशाली क्षण हैं ,जो हमें जैनधर्म-श्रमण संस्कृति,प्राकृत-संस्कृत-हिन्दी भाषाएं, सर्वप्राचीन ब्राह्मी लिपि तथा मूलभारतीय संस्कृति की प्रभावना के लिए निरंतर प्रेरित करते रहेंगे।
विश्ववंदनीय,परम ज्ञानी,परम तपस्वी, वर्तमान के भगवान आचार्य श्री भले ही सशरीर हमारे मध्य विराजमान नहीं हैं किन्तु उनके ज्ञान, दिगम्बरत्व की कठिन तपस्या-साधना का सूर्य सदैव हम सभी को अपने प्रकाश से आलोकित करता रहेगा । आचार्य श्री के जीवन दर्शन और उपदेशों ने लाखों लोगों के जीवन का कल्याण किया है। हर मनुष्य यदि आचार्य श्री के दिखाए हुए मार्ग को जीवन में आत्मसात करें तो वह स्वयं के जीवन को सार्थक करते हुए परिवार, समाज, भारत देश और विश्व के कल्याण में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।













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