संसार का प्रत्येक व्यक्ति अपने कहीं न कहीं गुरु के प्रति श्रद्धा भक्ति विनय समर्पण से ही जीवन में सफल होता है। श्रमण आचार्य विशुद्धसागरजी महाराज के सुयोग्य शिष्य श्रमण मुनिश्री सुप्रभ सागरजी ने ऋषिनगर जैन मंदिर में गुरु पूर्णिमा महापर्व के अवसर पर आशीर्वचन दिए। इस अवसर पर श्रुतपंचमी महापर्व पर आयोजित राष्ट्रीय निबंध प्रतियोगिता 2023 के प्रतियोगियों को सम्मानित किया। पढ़िए यह विशेष रिपोर्ट…
उज्जैन। जीवन में सफलता को यदि किसी भी जीव को प्राप्त करना है तो वह एक मात्र साधन है गुरु चरणों में है है निःस्वार्थ भाव से समर्पण। क्योंकि बिना गुरु कृपा के किसी का जीवन शुरु हो ही नहीं सकता। संसार का प्रत्येक व्यक्ति अपने कहीं न कहीं गुरु के प्रति श्रद्धा भक्ति विनय समर्पण से ही जीवन में सफल होता है। श्रमण आचार्य विशुद्धसागरजी महाराज के सुयोग्य शिष्य श्रमण मुनिश्री सुप्रभ सागरजी ने ऋषिनगर जैन मंदिर में गुरु पूर्णिमा महापर्व के अवसर पर आशीर्वचन दिए।
जीवन में कोई न कोई गुरु अवश्य
मुनिश्री ने कहा संसार के प्रत्येक व्यक्ति के जीवन में कोई न कोई गुरु अवश्य होता है। किसी की मां, किसी का पिता, किसी का भाई, किसी का मित्र, किसी की पत्नी गुरु होती है। यह सभी गुरु संसार में ही भटकाने वाले होते हैं लेकिन सच्चा गुरु तो वही है जो स्वयं संसार से पार होते हैं। आने वाले शरणागत को भी संसार से पार कराते हैं। पूर्णिमा भी आज गुरु के नाम से पूर्णता को प्राप्त हो गई। वह आज का दिन था जब तीर्थंकर महावीर को गौतम स्वामी जैसा शिष्य मिला और गौतम जैसे शिष्य को वर्धमान जैसे तीर्थकर गुरु मिले। उन गुरु के हमारे जीवन में अनंत उपकार हैं, जिन्होंने मात्र जीवन जीना ही नहीं सिखाया अपितु जन्म मरण से मुक्ति की कला भी सिखाई।
आज हम स्मार्ट हो गए लेकिन जीवन स्टार्ट नहीं हुआ
आज हम स्मार्ट सिटी में रहने लगे हैं हमारे पास स्मार्टफोन है। सब कुछ स्मार्ट हो गया है लेकिन सही मायने में हमारा जीवन स्टार्ट ही नहीं हुआ है। जीवन को यदि स्टार्ट करना है तो जीवन में एक गुरु का होना आवश्यक है। इस अवसर पर मंगलाचरण का सौभाग्य डॉ. अरिहंत जैन, मुंबई ने प्राप्त किया। गुरु पूजा से आराधना का क्रम शुरू हुआ, जिसमें महाराष्ट्र, मध्यप्रदेश, उत्तरप्रदेश आदि प्रांतों से आए गुरु भक्तों ने भक्ति करते हुए गुरु चरणों में अपनी विनयांजलि प्रस्तुत की। इसके बाद मुनि के सुमधुर स्वर में गाया हुआ एक आध्यात्मिक भजन में ज्ञानानंद स्वभावी हूं, मैं ज्ञानानंद स्वभावी हूं की लांचिंग के साथ ही सुप्रभ सागर एप भी लांच किया गया।
निबंध प्रतियोगिता के प्रतियोगी हुए सम्मानित
मीडिया प्रभारी प्रदीप झांझरी ने बताया कि श्रुतपंचमी महापर्व पर आयोजित राष्ट्रीय निबंध प्रतियोगिता 2023 के प्रतियोगियों को सम्मानित किया। पाद प्रक्षालन का सौभाग्य भरत कुमार जैन अध्यक्ष सकल जैन समाज परासिया ने प्राप्त किया। भक्ति नृत्य की प्रस्तुति श्रीसिद्ध क्षेत्र महावीर तपोभूमि के प्रज्ञा कलामंच के कलाकारों ने दी। डॉ. सुनील जैन, संचय ललितपुर और डॉ. राजेंद्र महावीर सनावद का सम्मान वर्षा योग समिति ने उनके श्रुत संवर्धन के प्रति समर्पण के लिए किया। इस अवसर पर चातुर्मास समिति के अध्यक्ष शांति कुमार कासलीवाल, ऋषिनगर जैन समाज के अध्यक्ष प्रमोद जैन, अनिल गंगवाल, अजित सेठी, अरविंद बुखारिया, अशोक जैन, आरसी जैन, दिनेश गोधा, जितेंद्र पडत, सत्येंद्र जैन, स्नेहलता सोगानी, संजय जैन, नितिन डोसी, सुनील कासलीवाल, दिलीप सोगानी आदि ने गुरु चरणों में विनयांजलि प्रस्तुत की।













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