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साधुओं से यह जानो आत्मा का कल्याण कैसे हो?: आचार्य पुलक सागर जी की धर्मसभा में आत्म कल्याण की सीख 


धरियावद में पांच दिवसीय ज्ञान गंगा महोत्सव के चौथे दिन धर्मसभा हुई। इसमें आचार्यश्री पुलकसागर जी ने श्रावकों को आत्म कल्याण और ज्ञान के बारे में बहुमूल्य वचनों से उपकृत किया। महोत्सव का विराम मंगलवार को होगा। धरियावद से पढ़िए, अशोक कुमार जेतावत की यह खबर…


धरियावद। साधुओं के सामने जाएं तो हमेशा जिंदा प्रश्न पूछें। जिनसे जीवन का कायाकल्प हो सके, जीवन में परिवर्तन हो सके। साधुओं से पूछना आपका रत्नत्रय कैसा, आपका स्वास्थ्य कैसा है, आपका आहार कैसा हुआ? ये ऐसे प्रश्न हैं जिनका कोई सार नहीं है, कोई सार्थकता नहीं है। यह विचार आचार्य पुलक सागर जी ने चंद्रप्रभ उद्यान के आनंद सभागार में पांच दिवसीय ज्ञान गंगा महोत्सव के चौथे दिन सोमवार को प्रकट किए। आचार्य श्री ने कहा कि जीवन में हमेशा ऐसे प्रश्न करो कि क्रोध, मान, माया, लोभ जैसे कषाय कैसे दूर किए जा सकते हैं। आत्मा का कल्याण कैसे हो? महाराज जी ने कहा कि आज ज्ञान गंगा महोत्सव के 4 दिन हो गए हैं। लोगों ने इन चार दिनों में ज्ञान का बहुत कुछ सुना है। ज्ञान रूपी गंगा में डूबकी भी लगाई है तो आपके जीवन में परिवर्तन अवश्य आना चाहिए। अगर आप कौआ बनकर आए थे तो हंस बनकर जाओ और अगर हंस बनकर आए थे तो परमहंस बनकर जाओ, जीवन में ऐसा परिवर्तन आना चाहिए।

राग-द्वेष, गुस्से का त्याग करना सीख लो

आचार्य श्री पुलक सागर जी ने कहा कि जिंदगी को अगर सत्यम, शिवम, सुंदरम बनाना है तो अपनी भूल को कबूल करना सीख लो और अपने मन में कोई शूल नहीं रखना सीख लो। किसी की कहीं कोई दो बात सहन करना सीख लो, इससे बड़ा कोई उपवास नहीं हो सकता है। आप अन्न-जल छोड़कर उपवास कर सकें, या नहीं कर सकें तो कोई बात नहीं, आपने कुछ समय के लिए मोबाइल फोन को छोड़ने, क्रोध, लालच, बुराई, ईर्ष्या आदि नहीं करने और इन दुष्प्रवृत्तियों को छोड़ने का प्रयास किया तो यह भी कोई उपवास से कम नहीं होता है। राग-द्वेष, गुस्से का त्याग करना सीख लो। आचार्य श्री ने कहा कि आपको करना ही है तो दिल में लव फैक्ट्री लगाओ, दिमाग में आइस फैक्ट्री लगाओ और जुबान पर शुगर फैक्ट्री लगाओ, तुम्हारा जीवन सफल हो जाएगा। जीवन में शांति और आराम से जीना सीख लो। हर कोई आदमी स्वर्ग जाने को तैयार है, पर स्वर्गीय कोई नहीं होना चाहता है। जाना स्वर्ग चाहते हैं, पर काम नरक के करते हैं। आप स्वर्ग जा सको या नहीं जा सको, कोई फर्क नहीं पड़ता है। पर काम ऐसे करो कि हर घर स्वर्ग बन जाए। स्वर्ग को जमीन पर लाने का पुरुषार्थ करो। जीवन को नरक मत बनाओ, स्वर्ग बनाने का प्रयास करो। दीपावली पर घर पर शुभ-लाभ भले ही नहीं लिख पाओ, लेकिन घर में हमेशा स्वर्ग का निर्माण करो। जो जीवन को स्वर्ग बनाता है, वह मरने के बाद अवश्य स्वर्ग को प्राप्त करता है।

आचार्य श्री पुलक सागर जी महाराज के आगामी संभावित कार्यक्रम

धरियावद में पांच दिवसीय ज्ञान गंगा महोत्सव का मंगलवार को 24 जून को विराम होगा। आचार्य श्री का श्री क्षेत्र सिद्धांत तीर्थ संस्थान नंदनवन-हिमवन की ओर विहार होगा और रात्रि विश्राम वहीं पर होगा। इसके अगले दिन बुधवार को आचार्य संघ की आहार्यचर्या नंदन में और सायंकाल बांसी मार्ग होते हुए भींडर की ओर मंगल विहार संभावित है।

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