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लाखेनी पंचमी समृद्धि, विकास, नई शुरुआत और दान के महत्व की है प्रतीक: लाखेनी पंचमी के दिन एक दिया गुरु के नाम कार्यक्रम का होगा आयोजन 


लाखेनी पंचमी के उपलक्ष्य में मंगलवार सांयकाल 7 बजे 1008 दीपकों से आचार्य श्री की विशेष महाआरती की गई। साथ ही गुरुदेव के श्री चरणों में महामाला भी अर्पित की गई। श्रद्धालुओं ने गुरुदेव का विशेष आशीर्वाद भी प्राप्त किया। पढ़िए ऋषभदेव से सचिन गंगावत की यह खबर-


 ऋषभदेव। नगर के भटारक यशकीर्ति गुरुकुल में राष्ट्रीय संत आचार्य पुलकसागर जी गुरुदेव की लाखेनी पंचमी मंगलवार के दिन विशेष एक दिया गुरु के नाम कार्यक्रम का आयोजन किया गया। पुलक मंच के राष्ट्रीय सांस्कृतिक मंत्री एवं अंतरराष्ट्रीय कवि बलवंत बल्लू ने बताया कि इस आयोजन में सकल जैन समाज के लोगों ने भाग लिया, जो लाखेनी पंचमी के उपलक्ष्य में मंगलवार सांयकाल 7 बजे 1008 दीपकों से आचार्य श्री की विशेष महाआरती की गई। साथ ही गुरुदेव के श्री चरणों में महामाला भी अर्पित की गई। श्रद्धालुओं ने गुरुदेव का विशेष आशीर्वाद भी प्राप्त किया।

राष्ट्रीय संत आचार्य श्री पुलकसागर जी गुरुदेव ने बताया कि लाभ पंचमी समृद्धि, पूजा और नई शुरुआत का दिन है। लाभ पंचमी, जिसे लाखेनी पंचमी और सौभाग्य पंचमी के नाम से भी जाना जाता है। एक सार्थक हिंदू त्योहार है, जिसे भक्ति, कृतज्ञता और देने की भावना के साथ मनाया जाता है। दिवाली के पांचवें दिन मनाया जाने वाला यह शुभ दिन समृद्धि, विकास, नई शुरुआत और दान के महत्व का प्रतीक है। लाभ पंचमी, जिसका अर्थ है “लाभ” लाभ, सकारात्मकता, विश्वास और सामुदायिक समर्थन को प्रेरित करता है, व्यक्तियों को दयालुता और उदारता के कार्यों के माध्यम से बदलाव लाने के लिए प्रोत्साहित करता है।

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