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वैराग्य पथ पर चले कुणाल अब मुनिश्री पुण्यरत्नसागर जी : दलाल बाग में दो मुमुक्षुओं ने ली दीक्षा 


वीआईपी रोड दलाल बाग स्थित नवरत्न वाटिका में दो दिन में दीक्षा समारोह और एक मुनिराज का गणि पद प्रदान महोत्सव हुआ। आचार्य श्री विश्वरत्नसागर, आचार्यश्री मृदुरत्न सागर जी महाराज सहित 70 साधु-साध्वी भगवंतों की निश्रा एवं उपधान तप के 70 तपस्वियों की उपस्थिति में यह अनुष्ठान किया गया। इंदौर से पढ़िए, साभार संकलित यह खबर…


इंदौर। वीआईपी रोड दलाल बाग स्थित नवरत्न वाटिका में दो दिन में दीक्षा समारोह और एक मुनिराज का गणि पद प्रदान महोत्सव हुआ। आचार्य श्री विश्वरत्नसागर, आचार्यश्री मृदुरत्न सागर जी महाराज सहित 70 साधु-साध्वी भगवंतों की निश्रा एवं उपधान तप के 70 तपस्वियों की उपस्थिति में यह अनुष्ठान किया गया। रविवार को युवा कुणाल कमठोरा 21 ने सांसारिक जीवन का त्याग कर संयम, त्याग और वैराग्य की राह चुनी। सुबह 9 बजे से दोपहर तक करीब 5 घंटे चली शास्त्रोक्त विधि के बाद मुमुक्षु कुणाल को आचार्यश्री ने नया नाम मुनि श्री पुण्यरत्नसागर दिया। साथ ही मुनिराज उदयरत्सागर जी को गणिवर्य की उपाधि प्रदान करते हुए उन्हें जिन शासन की परंपरा के अनुसार नूतन वस्त्र भेंटकर पाट पर विराजित किया। अर्बुद गिरिराज जैन श्वेतांबर तपागच्छ उपाश्रय ट्रस्ट, पीपली बाजार, समग्र जैन श्वेतांबर श्री संघ मालवा महासंघ्ज्ञ एवं नवरत्न परिवार के तत्वावधान में हुए आयोजन में हजारों समाजबंधु शामिल हुए। मुमुक्षु कुणाल पिछले दो वर्षों से अनेक तीर्थों सहित करीब एक हजार किमी विहार और गुरुकुलवास कर चुके हैं। वर्धमान तप की 15 ओली भी की। वे अब तक साध्वी वर्या सौम्ययशा श्रीजी की निश्रा में संयम की राह पर अग्रसर हुए।

उदयरत्न सागर जी को गणि पदवी मिली

मुनिराज श्री उदयरत्नसागर जी महाराज को गणि पद प्रदान महोत्सव भी इसी दौरान आरंभ हुआ। मुनिराज को गणिवर्य कीर्तिरत्नसागर जी महाराज ने नंदी सूत्र के 750 मंत्र सुनाए। उन्हें शांतिनाथ भगवान की प्रतिमा के सामने संकल्प दिलाए। आचार्यश्री एवं साधु भगवंतों ने उन्हें पाट पर विराजित कर चंदन तिलक लगाया और लाभार्थी परिवारों ने नूतन वस्त्र भेंट किए।

आचार्यश्री ने संन्यास का प्रतीक ओघा सौंपा

सुबह जब संसारी वेशभूषा में सोने के गहने पहने कुणाल आचार्यश्री से आशीर्वाद लेने के लिए पहुंचे तो उन्हें संन्यास का प्रतीक ओघा सौंपा गया। जिसे पाकर वे मंच पर खुशी से झूम उठे। भगवान शांतिनाथ की प्रतिमा की साक्षी में उन्होंने वैराग्य पथ पर चलने की विभिन्न विधियां निभाई। इस मौके पर समाजबंधुओं का बहुमान भी हुआ। महोत्सव के मुख्य लाभार्थी दिलीप-ललित सी जैन और प्रीतेश अनिता ओस्तवाल ने उन्हें साधु जीवन में काम आने वाली कामली, आसन, डांडी और अन्य वस्तुएं भेंट की। इस अवसर पर आयोजन समिति की ओर से पुण्यपाल सुराना, कैलाश नाहर, मनीष सुराना, दिलसुखराज कटारिया, अंकित मारू, दिलीप मंडोवरा और दीपक सुराना आदि ने समाजबंधुओं और संतों की अगवानी की। कार्यक्रम में समाजसेवी डॉ.प्रकाश बांगानी, यशवंत जैन, धर्मचंद्र जैन आदि मौजूद थे।

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