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कोठिया संयुक्त परिवार ने लिया एकजुट रहने का संकल्प: विश्व परिवार दिवस पर अनूठा और अनुकरणीय निर्णय 


वागड़ क्षेत्र के संयुक्त परिवारों में एक कोठिया संयुक्त परिवार ने विश्व परिवार दिवस पर विगत 65वर्षों से जारी अपने संयुक्त परिवार प्रकल्प को एक जुटता के साथ जारी रखने का संकल्प लिया। परिवार के मुखिया बदामीलाल कोठिया एवं कमला देवी कोठिया के नेतृत्व में 21 सदस्यीय यह संयुक्त परिवार विगत 7 दशकों से चार-चार पीढ़ियों के साथ अपनी सांस्कृतिक एवं सामाजिक विरासत को अक्षुण्ण बनाए हुए हैं। डडूका से पढ़िए, यह खबर…


डडूका। वागड़ क्षेत्र के संयुक्त परिवारों में एक कोठिया संयुक्त परिवार ने विश्व परिवार दिवस पर विगत 65 वर्षों से जारी अपने संयुक्त परिवार प्रकल्प को एक जुटता के साथ जारी रखने का संकल्प लिया। परिवार के मुखिया बदामीलाल कोठिया एवं कमला देवी कोठिया के नेतृत्व में 21 सदस्यीय यह संयुक्त परिवार विगत 7 दशकों से चार-चार पीढ़ियों के साथ अपनी सांस्कृतिक एवं सामाजिक विरासत को अक्षुण्ण बनाए हुए हैं। परिवार में चार पुत्र, चार बहुएं, पांच पौत्र, पांच बेटियां, दो पौत्र बहुएं, एक पोती सहित 21 व्यक्ति जब एक किचन में एक साथ भोजन करते हैं तो बाहर से आने वाले लोग समझते है कि घर पर कोई मेहमान आए हैं।

परिवार के मुखिया बदामीलाल कोठिया सहित परिवार में अजीत कोठिया एवं अशोक कोठिया स्टेट बैंक ऑफ इंडिया से सेवानिवृत हैं तो राजेंद्र कोठिया शिक्षा विभाग से सेवानिवृत हुए हैं। अनिल कोठिया डाइट गढ़ी में सेवारत हैं। पौत्र अविन कैडिला फार्मा में बिजनेस मैनेजर है, तो आयुष यूनियन बैंक में प्रोबेशनरी अधिकारी, नमन डॉक्टर तो दिशांत कोठिया एवं बहु शुभी अमेरिका में सेवारत है। प्रतिदिन प्रातः माता पिता के चरण स्पर्श से अपनी दिनचर्या प्रारंभ करने वाले ये परिजन रोजाना पार्श्वनाथ जिनालय में भगवान का अभिषेक एवं पूजा करने जाते हैं। रात्रि में रोजाना सामूहिक रूप से भक्तामर पाठ कर परिवार एवं विश्व की सुख समृद्धि की कामना की जाती है।

चारों बहुएं कुसुम कोठिया, सरिता कोठिया, निशा कोठिया एवं रजनी कोठिया तथा पौत्र वधुएं हीना, शुभी तथा निशि एक दूसरे का सम्मान करते हुए मिलजुल कर सारे कार्य करती हैं, जो इस युग के एक मिसाल है पारस्परिक सदभाव, प्रेम, सम्मान एवं समर्पण की। वर्ष में दो बार सभी परिजन सम्मेद शिखरजी, कुंडलपुर, अष्टापद, पावागढ़, तारंगाजी ओर अंदेशवर पार्श्वनाथ जैसे तीर्थ क्षेत्रों की यात्राएं भी करते हैं। परिवार की पड़पोती 7 वर्षीय अहाना अविन कोठिया ऐसे बड़े परिवार से जो संस्कार पा रही है वो किसी भी मायने में किसी गुरुकुल में मिलने वाले संस्कारों से कम नहीं है।

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