सारांश
श्रीमद् जिनेन्द्र पंचकल्याणक महामहोत्सव के अवसर पर बुधवार को चक्रवर्ती की दिग्विजय यात्रा उनके निवास से निकाली गई। यात्रा के वर्धमान सभागार पहुंचने पर वात्सल्य वारिधि आचार्यश्री वर्धमान सागर महाराज ससंघ के सानिध्य एवं गणिनी आर्यिका सरस्वती माताजी ससंघ की मौजूदगी में राज्याभिषेक व दीक्षाविधि संस्कार हुए। पढ़िए विस्तृत रिपोर्ट…

मदनगंज-किशनगढ़। श्री मुनिसुव्रतनाथ दिगंबर जैन पंचायत व सकल दिगम्बर जैन समाज की ओर से आयोजित श्रीमद् जिनेन्द्र पंचकल्याणक महामहोत्सव के अवसर पर बुधवार को चक्रवर्ती की दिग्विजय यात्रा उनके निवास से निकाली गई। हाथी और बग्घियों पर चक्रवर्ती का परिवार सवार हुआ। शाही लवाजमे के साथ आरके काॅलोनी से शोभायात्रा रवाना हुई। दिग्विजय यात्रा के वर्धमान सभागार पहुंचने पर वात्सल्य वारिधि आचार्यश्री वर्धमान सागर महाराज ससंघ के सानिध्य एवं गणिनी आर्यिका सरस्वती माताजी ससंघ की मौजूदगी में राज्याभिषेक व दीक्षाविधि संस्कार जयकारों के बीच संपन्न हुई।

आठ बग्घियों में विमल कुमार, महेन्द्रकुमार, समर्थ कुमार पाटनी उरसेवा वालों का परिवार सवार था। बैंड की मधुर ध्वनियों के बीच निकली यात्रा के दौरान जैन समाज के लोगों ने नृत्य करते हुए खुशियां मनाईं। चक्रवर्ती परिवार का जगह-जगह जैन समाज के लोगों ने श्रीफल भेंटकर अभिनंदन किया। भगवान के माता-पिता ने संहितासूरि पंडित हंसमुख जैन धरियावद के मंत्रोच्चार के बीच तीर्थंकर बालक का राज्याभिषेक करवाया गया। बाद में वैराग्य दर्शन व तीर्थंकर महाराज का गृह त्याग का मंचन किया गया।

कार्यकारिणी सदस्य मुकेश पाटनी एवं सुरेश बागड़ा ने बताया कि आचार्यश्री के सानिध्य में दीक्षा विधि संस्कार, तपकल्याणक पूजा व हवन का आयोजन किया गया। दीक्षा के दौरान पांडाल में मौजूद हजारों जैन समाज के लोगों ने श्रीशांतिनाथ महामुनि एवं श्री चन्द्रप्रभ महामुनिराज व आचार्य वर्धमान सागर महाराज के जयकारों से माहौल गुंजा दिया। कार्यक्रम के दौरान श्रावक आदिश्वर ने दीक्षा के लिए आचार्यश्री को श्रीफल भावांजलि प्रस्तुत की। अन्य श्राविकाओं द्वारा भी अष्ट प्रतिमा के नियम हेतु श्रीफल भेंट किया गया। आचार्यश्री ने जैनेश्वरी दीक्षा शीघ्र ही किशनगढ़ में कराने का आशीर्वाद दिया।













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