श्री 1008 आदिनाथ त्रिकाल चौबीसी मज्जिनेन्द्र अंतरराष्ट्रीय पंचकल्याणक प्रतिष्ठा महा महोत्सव कल्पतरु में केवल ज्ञान कल्याणक मनाया गया।पढ़िये राजेश जैन दद्दू की रिपोर्ट…
इंदौर। श्री 1008 आदिनाथ त्रिकाल चौबीसी मज्जिनेन्द्र अंतरराष्ट्रीय पंचकल्याणक प्रतिष्ठा महा महोत्सव कल्पतरु में आचार्य श्री विशुद्ध सागर जी महाराज के परम शिष्य मुनिश्री 108 आदित्य सागरजी महाराज, मुनिश्री अप्रमित सागर जी महाराज, मुनिश्री सहज सागर जी महाराज के परम सानिध्य में प्रतिष्ठाचार्य पं.पवन दीवान एवं सह प्रतिष्ठाचार्य पं.नितिन झांझरी बाल ब्रह्मचारी पियुष भैया जी के पावन निर्देशन में केवल ज्ञान कल्याणक मनाया गया।

हुई केवलज्ञान की पूजा
प्रातः जिनाभिषेक, शांतिधारा, नित्य पूजन, देव शास्त्र गुरु की केवलज्ञान की पूजा की गई। महा मुनिराज आदिनाथ की छ महीने बाद आहार चर्या इक्षु रस के साथ पहला ग्रास राजा श्रेयांस एवं राजा सोम के द्वारा दिया गया। फिर इन्द्र- इंद्राणियों एवं सैकड़ों लोगों ने मुनिराज को आहार कराया।
प्रतिमाओं को बनाया पूजनीय
तीर्थंकर मुनि दीक्षा के बाद मौन होकर घोर तपस्या कर धर्म ध्यान को बढ़ाते हुए मोहनीय कर्म का पूर्ण क्षय करते हुए बारहवें गुणस्थान ज्ञानावरण, दर्शनावरण अन्तराय कर्म का क्षय करते हुए केवलज्ञान को प्राप्त कर लेते हैं। मुनिश्री आदित्य सागरजी महाराज अप्रमित सागर महाराज, सहज सागर महाराज के ससंघ ने सारी प्रतिमाओं को सूर्यमंत्र देकर पूजनीय बना दिया, फिर सारी प्रतिमाएं पूजनीय हुईं।
समवशरण की हुई रचना
दोपहर में समवशरण की रचना की गई। इस सभा में इंदौर नगर के मूर्धन्य विद्वान पंडित रतनलाल, प्रवीण जैन, पीसी जैन, मनीष जैन, अर्पित वाणी, टीके वेद, राजेश जैन दद्दू आदि समाज जन उपस्थित हुए। समवशरण में केवलज्ञान होने के बाद सौधर्म इन्द्र की आज्ञा से कुबेर विशेष रत्न एवं मणियों से समवशरण की रचना करता है। समवशरण मे बारह घेरे होते हैं। शाम को भव्य आरती की गई। जिसमें बड़ी संख्या में पुरुष एवं महिलाएं संगीत की धुन पर नृत्य करते आरती की।













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