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कर्म अपराधी को सजा नहीं देता और छोड़ता भी नहींः मुनि सुधासागर जी

कर्म अपराधी को सजा नहीं देता और छोड़ता भी नहींः मुनि सुधासागर जी

 

व्यक्ति को सजा देते हैं उसके कर्म ही

 

ललितपुर। श्री अभिनन्दनोदय अतिशय तीर्थ में निर्यापक श्रमण मुनिपुंगव सुधासागर महाराज ने टीकमगढ़ से आए गुरुभक्तों को संबोधित करते हुए कहा-जो कम्मे सूरा सो धम्मे सूरा। जो कर्म करने में शूरवीर होता है, वही धर्म करने में भी शूरवीर होता है। जो कर्म नहीं कर सकता, वह धर्मवीर भी नहीं हो सकता। धर्मात्मा बनने का अधिकार उसी को है, जो पाप करने में समर्थ होने पर भी पाप नहीं करता। जो बडे़ से बड़ा पाप कर सकता है, संसार के, वही धर्मात्मा बन सकता है।

उन्होंने कहा कि जिनवाणी भी कहती है-भोग सामने है, उन्हें भोग सकता है, पर क्यों नहीं भोग रहे हो तो धर्मात्मा कहता है, मेरे भगवान ने मना किया है, मैं ऐसा कोई भी कार्य नहीं करूगा जिसे भगवान ने मना किया हो। समझ लेना वही सच्चा धर्मात्मा है। दुनिया कानून के डर से अपराध नहीं करती, उसे पता है अगर कानून से खिलवाड़ करेंगे तो सीधे जेल जायेंगे क्योंकि देश का कानून व्यक्ति को अपराध करने की इजाजत नहीं देता।

उन्होंने कहा कि व्यक्ति को उसके कर्म ही सजा देते हैं। दण्डाधिकारी कर्म हैं। न्यायाधीश कर्म को बनाया और कर्म पक्षपाती नहीं होता जैसा तुम करोगे तुम्हें वैसी ही सजा मिलेगी। कर्म से कभी भूल नहीं होती। भूल तो मनुष्यों से होती है। अगर भगवान और गुरु को दण्ड देने का अधिकार मिलता तो प्रभु और गुरु तो बडे़ दयालु होते हैं।

हम सब उनकी ही सन्तानें हैं। व्यक्ति पाप करके भगवान के मंदिर में जाता, गुरु के पास जाता और कहता कि मुझे क्षमा कर दो। किसी की हत्या करके आया और भगवान से क्षमा मांग लेता। व्यक्ति की मां और पत्नी आ जाती, रोती गिड़गिड़ाती और अपने पुत्र या पति के प्राणों की दुहाई देती। मां कहती मैं निपूती हो जाऊंगी, पत्नी कहती मेैं विधवा हो जाऊंगी, भगवान उन्हें क्षमा कर दें। भगवान पिघल जाते, माफ कर देते इससे अराजकता फैल जाती।

मुनि श्री ने कहा कि अदालत जब फांसी की सजा देती है तो उसके पीछे के अपराध को देखती है। उसके पीछे कितने अनाथ होंगे, अदालत यह नहीं देखती। उसी प्रकार कर्म रूपी न्यायाधीश भी सजा सुनाते समय अपराधी के अपराध को देखता हे, उसके पीछे कितने अनाथ होंगे, कर्म नहीं देखता। इसलिए कर्म को निर्दयी कहा है। कर्म अपराधी को सजा नहीं देता और अपराधी को छोड़ता भी नहीं है।

मुनि श्री ने आगे कहा कि कर्मों के दरबार में सच्चा न्याय है। इसलिए उसे न्यायाधीश कहा है।

 

रविवार को टीकमगढ़ से श्री नंदीश्वर कालोनी के पंचकल्याणक हेतु वहां की कमेटी, समस्त महिला मंडल, स्वयंसेवी संगठन तथा श्रेष्ठी वर्ग ने मुनि श्री के चरणों में टीकमगढ़ आने के लिए श्रीफल समर्पित किया। सभा का संचालन महामंत्री डा. अक्षय टडैया ने किया। जैन समाज अध्यक्ष अनिल

अंचल प्रबंधक राजेन्द्र थनवारा एवं पंकज मोदी ने सभी गुरुभक्तों का सम्मान किया

अभिनन्दनोदय तीर्थ में मुनि श्री के मुखारविन्द से शान्तिधारा करने का सौभाग्य तरुण रजनी काला व्यावर मुम्बई, चन्द्रावाई संदीप सराफ अलंकार ज्वैलर्स, अजित कुमार सनत कुमार अनंत फर्नीचर शिवपुरी के अलावा स्थानीय श्रावक श्रष्ठियों के परिवार को मिला।

 

रविवार को निर्यापक मुनि श्री सुधासागर महाराज को आहार एवं पडगाहन समतादेवी संतोषजैन, सरोज जैन सुरभि सौरभ भारिल्ल बरोदास्वामी को अभिनंदनोदय तीर्थ धर्मशाला में, मुनि पूज्यसागर महाराज को आहार एवं पडगाहन दीपक मलैया बस्तु परिवार, ऐलक धैर्यसागर को आहार एवं पडगाहन स्व. दयसारचंद जरावली परिवार, अज्जू जैन एवं क्षुल्लक गम्भीर सागर महाराज आहारदान एवं पडगाहन नवीन मनीष जैन मार्डन परिवार को मिला।

 

 

श्री अभिनंदनोदय अतिशय क्षेत्र में 2 नवम्बर से अष्ठानिका महापर्व

महावीर जयंती एवं धार्मिक आयोजन समिति संयोजक मनोज बबीना ने बताया कि श्री अभिनंदनोदय अतिशय क्षेत्र में 2 से 8 नवम्बर तक अष्ठानिका महापर्व के अवसर पर मुनि संघ के सान्निध्य में श्री सिद्धचक्र महामंडल विधान एवं विश्वशान्ति यज्ञ का आज द्रव्य पुण्यार्जक मदन लाल काका परिवार के आवास से मंदिर जी के लिए लाया गया। कल से यह यज्ञ प्रारंभ हो जायेगा। यह आयोजन प्रदीप भैया सुयश अशोक के द्वारा संपन्न कराया जायेगा

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