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अंतर्मुखी मुनि पूज्य सागर महाराज का वर्षायोग : श्री 1008 मुनिसुव्रतनाथ दिगंबर जैन मंदिर में हुआ कलश स्थापना कार्यक्रम


आचार्य श्री अभिनंदन सागर महाराज के शिष्य अंतर्मुखी मुनि श्री पूज्य सागर महाराज एवं क्षुल्लक अनुश्रमण सागर महाराज के पूज्य वर्षायोग -2023 की स्थापना मंगल कलश के साथ स्मृति नगर स्थित श्री 1008 मुनिसुव्रतनाथ दिगंबर जैन मंदिर में की गई। इस अवसर पर आयोजित धर्मसभा में मुनि श्री के प्रवचन भी हुए। पढ़िए यह विशेष रिपोर्ट…


इंदौर। आचार्य श्री अभिनंदन सागर महाराज के शिष्य अंतर्मुखी मुनि श्री पूज्य सागर महाराज एवं क्षुल्लक अनुश्रमण सागर महाराज के पूज्य वर्षायोग -2023 की स्थापना मंगल कलश के साथ स्मृति नगर स्थित श्री 1008 मुनिसुव्रतनाथ दिगंबर जैन मंदिर में की गई।

श्री श्री 1008 मुनिसुव्रतनाथ दिगंबर जैन श्रमण संस्कृति धार्मिक एवं परमार्थिक ट्रस्ट स्मृति नगर की ओर से आयोजित चातुर्मास में चातुर्मास के दो मुख्य कलश की स्थापना, भगवान मुनि सुव्रत सर्वार्थ सिद्धि कलश भरत जैन परिवार, इंदौर एवं चिंतामणी पार्श्वनाथ चिंतामणी कलश कांतिलाल बम द्वारा, की गई।

इसके अलावा आचार्य श्री शान्तिसागर कलश की स्थापना मंजू, रितेश, रूपेश जैन परिवार, आचार्य अभिनंदन सागर कलश की स्थापना संदीप ओमप्रकाश सेठी, गुवाहाटी परिवार एवं आचार्य वर्धमान सागर कलश की स्थापना रंजू अजित जैन,गुवाहाटी परिवार द्वारा की गई। कलश स्थापना के प्रथम चरण में मंगल कलश की शोभायात्रा के माध्यम से कलश पूजन, शुद्धिकरण किया गया।

उसके बाद मंगल द्रव्यों से मांगलिक परिवारों द्वारा सुहस्त हाथों से कलशों में दिव्य द्रव्य भरा गया। मुनि श्री का पाद प्रक्षालन भरत जैन परिवार एवं कांतिलाल बम परिवार द्वारा किया गया। दीप प्रज्वलन मुनि श्री के गृहस्थ अवस्था के माता-पिता सोमचंद्र- विमला जैन द्वारा किया गया।

कार्यक्रम में 48 दिवसीय अखंड श्री गणधर वयल महामंत्र महाराधना एवं विश्व कल्याण कामना महायज्ञ पत्रिका का विमोचन उपस्थित अतिथियों द्वारा किया गया। विधान की सभी क्रियाएं ब्रह्मचारी अजय भैया के निर्देशन में की गई। कार्यक्रम का संचालन और पूज्य वर्षायोग-2023 का निर्देशन ब्र. तरुण जैन ने किया।

इस अवसर पर मुनि श्री के प्रवचन भी हुए। वर्षायोग मंगल कलश स्थापना में योगेंद्र जैन, सागरमल, कैलाश लुहाड़िया, योगेश जैन, राजेश पंचोली, राहुल-नवीन ढोल्या, सुकुमाल मोदी, सुदर्शन जैन सहित अन्य समाज श्रेष्ठी मौजूद रहे।

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