सनावद निवासी ज्योति बाला धनोते ने आचार्य वर्धमान सागर जी महाराज की सन्निधि में रहकर 32 उपवास की कठिन साधना सफल की। वे लगातार 13 वर्षों से यह तप कर समाज में प्रेरणा का स्रोत बनी हुई हैं। पढ़िए सन्मति जैन काका की रिपोर्ट…
सनावद निवासी ज्योति बाला पवन कुमार धनोते ने जैन धर्म की परंपरा को आगे बढ़ाते हुए 32 उपवास की कठिन तपस्या पूर्ण की। जैन धर्म में उपवास को आत्मा की शुद्धि और कर्मों के क्षय का मुख्य साधन माना गया है, जिससे पुण्य की प्राप्ति होती है और जीवन में सुख, स्वास्थ्य तथा समृद्धि आती है। सन्मति जैन काका ने बताया कि ज्योति बाला जी पिछले तेरह वर्षों से निरंतर यह साधना कर रही हैं। वे प्रतिवर्ष आचार्य रत्न श्री वर्धमान सागर जी महाराज की सन्निधि में रहकर इस तप को सम्पन्न करती हैं। इस वर्ष भी उन्होंने टोंक, राजस्थान में रहकर आचार्य श्री के आशीर्वाद से यह उपवास सफल किए।
नगर में रहते हुए भी वे साधु-संतों की सेवा और उनके आहार-विहार में निरंतर सहयोग करती रहती हैं। उनकी इस साधना की समाजजनों ने भूरि-भूरि अनुमोदना की और मंगलकामना की कि वे इसी प्रकार जैन धर्म की पताका को निरंतर फहराती रहें।













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