सनावद के श्री 1008 चिन्तामणी पार्श्वनाथ स्वामी जिनालय में युगल मुनिराज मुनि श्री विश्वसूर्य सागर जी महाराज एवं मुनि श्री साध्य सागर जी महाराज के सानिध्य में जिनसहस्त्रनाम शान्तिधारा एवं कलशाभिषेक संपन्न हुए। समाजजनों ने 1008 अर्घ्य अर्पित कर धर्मलाभ पाया। पढ़िए पूरी रिपोर्ट…
सनावद। श्री 1008 चिन्तामणी पार्श्वनाथ स्वामी के दिव्य जिनालय में प्रातःकाल की मंगल बेला में युगल मुनिराज मुनि श्री विश्वसूर्य सागर जी महाराज एवं मुनि श्री साध्य सागर जी महाराज के सानिध्य में जिनसहस्त्रनाम शान्तिधारा एवं कलशाभिषेक का आयोजन हुआ।
सन्मति जैन काका ने बताया कि महालक्ष्मी सर्वार्थसिद्धि योग में सम्पन्न इस अनुष्ठान में पूज्य मुनिश्री साध्यसागर जी महाराज के मुखारविंद से 1008 नाम मंत्रों का विशिष्ट उच्चारण हुआ। श्रद्धालुओं ने 1008 सहस्त्र नामों के जाप के साथ 1008 अर्घ्य अर्पित किए और धर्मलाभ प्राप्त किया।
सफलता और उन्नति की सिद्धि में अत्यंत महत्वपूर्ण
मुनिश्री ने अपने उद्बोधन में कहा कि शान्तिधारा मनुष्य जीवन की सफलता और उन्नति की सिद्धि में अत्यंत महत्वपूर्ण है। यह अनुष्ठान विश्वशांति और जीवन की बाधाओं को दूर करने में सहायक होता है। इस अवसर पर हेमेन्द्र काका, निमिष जैन, प्रशांत जैन, इंजीनियर मनोज जैन, मयंक धनोते, अक्षय सराफ, मुकेश जैन, परिन जैन, आशीष जैन, विशाल वैभव सराफ, चिराग लश्करे, अनुभव सराफ, हेमू जैन, सुधीर जैन, राहुल स्वास्तिक और प्रतीक जैन सहित अनेक समाजजन उपस्थित रहे और धर्म प्रभावना में सहयोगी बने।













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