समाचार

श्रीमद जिनेन्द्र पंचकल्याणक प्रतिष्ठा प्राण महामहोत्सव: गाजे-बाजे संग निकली चक्रवर्ती की दिग्विजय यात्रा, राज्याभिषेक व दीक्षा विधि संस्कार जयकारों के साथ हुआ 


सकल दिगम्बर जैन समाज की ओर से आयोजित श्रीमद जिनेन्द्र पंचकल्याणक महा महोत्सव के अवसर पर बुधवार को चक्रवती की दिग्विजय यात्रा के वर्धमान सभागार पहुंचने पर वात्सल्य वारिधि आचार्यश्री वर्धमान सागर महाराज ससंघ के सानिध्य में राज्याभिषेक व दीक्षाविधि संस्कार जयकारों के बीच किया गया। पढ़िए राजेश पंचोलिया की विस्तृत रिपोर्ट…


उदयपुर। सकल दिगम्बर जैन समाज की ओर से आयोजित श्रीमद जिनेन्द्र पंचकल्याणक महा महोत्सव के अवसर पर बुधवार को चक्रवती की दिग्विजय यात्रा के वर्धमान सभागार पहुंचने पर वात्सल्य वारिधि आचार्यश्री वर्धमान सागर महाराज ससंघ के सानिध्य में राज्याभिषेक व दीक्षाविधि संस्कार जयकारों के बीच किया गया।

पंचकल्याणक प्रतिष्ठा प्राण महामहोत्सव के तीसरे दिन चक्रवर्ती की दिग्विजय यात्रा गाजे-बाजे के साथ निकाली गई। बैड की मधुर ध्वनियों के बीच निकली यात्रा के दौरान जैन समाज के लोगों ने नृत्य करते हुए खुशियां मनाई। यात्रा फतह स्कूल स्थित वर्धमान सभागार पहुंची। वात्सल्य वारिधि आचार्यश्री वर्धमान सागर महाराज ससंघ के सानिध्य में जयकारों के बीच भगवान के माता-पिता ने संहितासूरि पंडित हंसमुख जैन धरियावद के मंत्रोच्चार के बीच तीर्थंकर बालक का राज्याभिषेक करवाया गया। बाद में वैराग्य दर्शन व तीर्थंकर महाराज का गृह त्याग का मंचन किया गया। आचायश्री के सानिध्य में दीक्षा विधि संस्कार, तपकल्याणक पूजा व हवन का आयोजन किया गया।

तीर्थंकर राजकुमार ने संयम की ओर कदम बढ़ाए

श्रीमद जिनेन्द्र पंचकल्याणक प्रतिष्ठा प्राण महामहोत्सव के तहत वर्धमान सभागार में आयोजित प्रवचन सभा में आचार्यश्री वर्धमान सागर जी ने कहा कि तीर्थंकर राजकुमार ने भोगों से विरक्त होकर संयम की ओर कदम बढ़ाए। दीक्षा धारण की। साधक बने और आत्म साधना में लीन होकर महामुनिराज ऋषभदेव ध्यान मग्न हुए छह माह की साधना की मुनियों की आहार चर्या बताने के लिए वह आहार पर उठे संसारी प्राणी की तरह श्री ऋषभदेव महामुनिराज को भी कर्म बंघ था। अंतराय कर्म के उदय से 6 माह तक आहार नहीं हुआ क्योंकि श्रावक आहार विधि नहीं जानते थे। विहार करते हुए जब ऋषभदेव महामुनिराज हस्तिनापुर गए तब राजा श्रेयांश को पूर्व भव का जाति स्मरण हुआ और पिछली आहार चर्या नवधा भक्ति याद आई तब उन्होंने ऋषभदेव महामुनि राज को नवधा भक्ति से आहार दिया।

आचार्य श्री शांतिसागर ने जिनवाणी का संरक्षण कराया 

आचार्य श्री ने प्रवचन में आगे बताया कि ऋषभदेव महामुनिराज जन्म से मति ज्ञान श्रुतज्ञान, तथा अवधिज्ञान के धारी होते हैं। तथा जब मुनिराज बनते हैं तब उन्हें मंनपर्यय ज्ञान भी हो जाता है। नीलांजना की मृत्यु को देखकर राजा ऋषभदेव को वैराग्य हुआ दीक्षा के बाद अंतरंग एवं बहिरंग तप के द्वारा ध्यान करते हुए कर्मों की निर्जरा कर केवल ज्ञान प्राप्त करेंगे। 20 वी सदी में उसी मार्ग का अनुसरण कर निर्वाह आगम अनुसार निर्दोष चर्या का पालन कर प्रथमाचार्य श्री शांति सागर जी ने सन 1920 में मुनि दीक्षा ली। सन 1924 में आचार्य बने । वर्ष 2024 को आचार्य पद का शताब्दी वर्ष अखिल भारतीय स्तर पर महासभा आयोजन कर रही हैं अनुकरणीय प्रयास के लिए आशीर्वाद। आचार्य श्री ने बताया कि आचार्य श्री शांति सागर जी ने धर्म संस्कृति की रक्षा के लिए 1105 दिनो तक आहार में अन्न का त्याग किया। जिनवाणी का संरक्षण कराया। आचार्य श्री ने समाज को जागरूक एवम् संगठित होकर सभी को जनगणना,शिक्षा,तीर्थ रक्षा तथा आचार्य श्री के यश कीर्ति के गुणानुवाद करने की प्रेरणा दी

पंचकल्याणक पाषाण को भगवान बनाने की क्रिया

आचार्य श्री के मंगल देशना के पूर्व संघस्थ शिष्या आर्यिका श्री महायशमति माताजी के प्रवचन हुए । प्रवचन में उदयपुर के पुण्य की सराहना कर बताया कि यह आयोजन केवल सर्व ऋतु विलास मंदिर का नहीं होकर संपूर्ण उदयपुर नगरी का है । उदयपुर नगरी न केवल झीलों की नगरी है वरन धर्म की नगरी है। पंचकल्याणक का महत्व बताते हुए माताजी ने बताया कि पंचकल्याणक पाषाण को भगवान बनाने की क्रिया है यह अनुष्ठान प्रेरणा देता है कि हमें धार्मिक क्रियाओं पालन करना चाहिए।

पंचकल्याणक आत्मा को परमात्मा बनाने , पतित को पावन बनाने, तीर्थंकर प्रभु की कथा सुनने और धर्म की महिमा बताने का माध्यम है। पंचकल्याणक में अभी तक आपने गर्भ कल्याणक और जन्म कल्याणक देखा है। आज दीक्षा तप कल्याणक होगा, कल केवल ज्ञान कल्याणक और अंतिम दिवस मोक्ष कल्याणक होगा पंचकल्याणक से आपको छोटे-छोटे नियम लेकर जीवन को धर्म पर मार्ग पर चलने के लिए प्रयास करना चाहिए इसके लिए छोटे बच्चों को संस्कारित करना बहुत जरूरी है।

5 मई तक खुली रहेगी वात्सल्यमय जीवन दर्शन प्रदर्शनी

वात्सल्यमय जीवन दर्शन प्रदर्शनी 5 मई तक आमजन के लिए भी सुबह 8 से रात्रि 9 बजे तक खुली रहेगी श्रीमद जिनेन्द्र पंचकल्याणक प्राण प्रतिष्ठा महा महोत्सव के तीसरे दिन बुधवार को विभिन्न कार्यक्रम हुए। जन्मकल्याणक के तहत प्रतिष्ठाचार्य संहितासूरि हंसमुख जैन के निर्देशन में सुबह जिनाभिषेक एवं नित्यार्जन और बाल क्रीडा का आयोजन किया गया। वर्धमान सभागार में वात्सल्य वारिधि आचार्य वर्धमान सागर महाराज ससंघ के मंचासीन होने के बाद चित्र अनावरण दिगम्बर जैन महासभा के पदाधिकारियों द्वारा किया गया। दीप प्रवज्जलन और शास्त्र भेंट करने सौभाग्य सेक्टर 11 पंच कल्याणक प्रतिष्ठा समिति को मिला वही पाद प्रशालन करने का सौभाग्य डागरिया परिवार को प्राप्त हुआ। सेक्टर 11 में 21 मई से 25 मई तक होने वाली पंच कल्याणक पत्रिका का आचार्य श्री ने विमोचन किया

शास्त्र सभा के बाद स्थानीय महिलाओं के द्वारा आचार्य वर्धमान सागर गौरव गाथा सुंदर नाटिका मंचन को देखने के लिए जैन समाज के लोगों का सैलाब उमड़ा।

आप को यह कंटेंट कैसा लगा अपनी प्रतिक्रिया जरूर दे।
+1
2
+1
1
+1
0
Shreephal Jain News

About the author

Shreephal Jain News

Add Comment

Click here to post a comment

You cannot copy content of this page