बड़वानी के जैन मंदिर में आर्यिका विकुंदन श्री माताजी ने धर्मसभा में कहा कि जीनागम के शास्त्रों का हर शब्द ज्ञान की खान है। मोह से मुक्त होकर संयम और सद्भाव के साथ जीवन जीने से ही सच्चा सुख मिलता है। पढ़िए दीपक प्रधान की रिपोर्ट…
धामनोद। बड़वानी के दिगंबर जैन मंदिर में राष्ट्र संत गणाचार्य विराग सागर जी महाराज की शिष्या, श्रमणी विदुषी आर्यिका विकुंदन श्री माताजी ने धर्मसभा को संबोधित करते हुए कहा कि जीनागम के शास्त्रों का एक-एक शब्द ज्ञान की खान है। उन्होंने कहा कि प्रेम और मोह में अंतर समझना आवश्यक है — प्रेम शुद्धता का प्रतीक है जबकि मोह दुख और भ्रम का कारण बनता है।
माताजी ने कहा कि आज के युग में अपेक्षाएं बढ़ रही हैं और जहां अपेक्षा होती है वहां उपेक्षा निश्चित है। संयम, आत्मचिंतन और शांति से ही जीवन में संतुलन आ सकता है। उन्होंने कहा कि धर्म की साधना जीवन को दिशा देती है और अब्रह्म से बचकर, नियमों में रहकर जीवन को मोक्षमार्ग की ओर बढ़ाना चाहिए।
माताजी ने बताया कि यदि हम जिनागम के शास्त्रों की एक-एक पंक्ति को समझकर आचरण में उतारें तो जीवन सफल बन सकता है। इसी अवसर पर राष्ट्रीय जैन एकता मंच द्वारा भगवान महावीर जन्म कल्याणक अवसर पर वीर श्राविका सम्मान समारोह आयोजित किया गया, जिसमें सेवा भावना और कर्तव्यनिष्ठा के लिए महिलाओं को सम्मानित किया गया।
विनीता जैन ने बताया कि बड़वानी की सपना मनीष जैन, जितेंद्र नीना गोधा और प्रवीणा लोकेश पहाड़िया को यह वीर श्राविका सेवा सम्मान आर्यिका विकुंदन श्री माताजी के करकमलों से प्रदान किया गया।













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