आचार्य श्री विनिश्चय सागरजी महाराज सानिध्य में हो रहे पंचकल्याण महोत्सव के दूसरे दिन भगवान का जन्म कल्याणक महोत्सव मनाया गया। जन्म कल्याणक की पूर्व रात्रि में गर्भ कल्याणक की क्रिया हुई। इंद्र दरबार लगाया गया एवं माता के 16 सपनों का मंचन किया गया। रामगंजमंडी से पढ़िए, अभिषेक जैन लुहाड़िया की यह खबर…
रामगंजमंडी। आचार्य श्री विनिश्चय सागरजी महाराज सानिध्य में हो रहे पंचकल्याण महोत्सव के दूसरे दिन भगवान का जन्म कल्याणक महोत्सव मनाया गया। जन्म कल्याणक की पूर्व रात्रि में गर्भ कल्याणक की क्रिया हुई। इंद्र दरबार लगाया गया एवं माता के 16 सपनों का मंचन किया गया। रविवार सुबह श्री जी का अभिषेक और शांतिधारा की गई। इसके बाद जन्म कल्याणक महोत्सव का पूजन हुआ एवं जन्म कल्याणक महोत्सव मनाया गया। जन्म कल्याणक महोत्सव की बेला में जैसे ही तीर्थंकर बालक का जन्म हुआ। वैसे ही इंद्र का सिंहासन कंपायमान होने लगा और उसके बाद खुशियां मनाई गइर्। साथ ही कुबेर इंद्र द्वारा रत्न वृष्टि की गई, नृत्य किए गए। इस बेला में सौधर्म इंद्र-इंद्राणी संवाद के साथ कुबेर इंद्र-इंद्राणी का संवाद भी दर्शाया गया। जैसे ही यह घोषणा हुई कि भगवान का जन्म हो गया है, सारा मंच खुशियों से झूम उठा और जय जयकार कर भक्ति नृत्य करने लगा। संपूर्ण महोत्सव विधि-विधान के साथ ब्रह्मचारी नमन भैया करवा रहे हैं। इस अवसर पर पूरा वातावरण भक्ति से ओतप्रोत था।
शोभायात्रा में नगरवासियों का उत्साह रहा चरम पर
सभी इंद्र-इंद्राणी को बग्गी में बिठाकर भव्य शोभायात्रा निकाली गई, जो बहुत ही भव्य एवं अलौकिक थी। इस शोभायात्रा में सभी भक्त जय-जयकार भक्ति नृत्य करते चल रहे थे एवं नगर के प्रमुख मार्गाें से होते हुए यह शोभायात्रा कृषि उपज मंडी पहुंची। जहां पांडुक शिला पर सौधर्म इंद्र द्वारा तीर्थंकर बालक का जन्माभिषेक किया गया। शोभायात्रा का जगह-जगह स्वागत किया गया। वहीं आदिनाथ जैन श्वेतांबर श्री संघ की ओर से अध्यक्ष राजकुमार पारख के नेतृत्व में स्वागत किया गया। वर्ष 2007 के बाद हुए नगर में हुए पंच कल्याणक महोत्सव में निकली शोभायात्रा में उत्साह भरपूर था। 2007 में जो पंचकल्याणक हुआ था वह 2 से 7 मई तक मनाया गया था और 4 मई को जन्म कल्याणक महोत्सव मनाया गया था। उस समय अतिथि के रूप में उस समय राज्य के गृहमंत्री रहे गुलाबचंद कटारिया थे।
पुरुषार्थ बड़ा होना चाहिए-आचार्य श्री
जन्म कल्याणक महोत्सव की बेला में आचार्य श्री विनिश्चय सागरजी महाराज ने मंगल प्रवचन देते हुए कहा कि पुण्य आता कैसे है। इसके विषय में बताया कि झोली तो इतनी बड़ी है लेकिन, पुरुषार्थ सुई की नोक के बराबर है। पुरुषार्थ भी बड़ा होना चाहिए तथा आस्था बड़ी होनी चाहिए। आस्था जितनी विशाल होगी, पुण्य उतना अधिक आपके पास आएगा। आचार्य श्री ने कहा कि पुण्य भी रंग बदलता है। अक्सर आप देखना पुण्य जब मुख मोड़ता है, जब आपको उसकी जरूरत है। पुरुषार्थ इतना करो कि उसे मुंह मोड़ने का समय ही ना मिले। भगवान का जन्म कल्याणक होता है तो सौधर्म इंद्र का सिंहासन भी कंपायमान होने लगता है। वह सोचने पर मजबूर हो जाता है कि मेरा सिंहासन क्यों डोल रहा है? पुण्य के संदर्भ में गुरुदेव ने कहा कि जहां शांत परिणाम होते ह।ैं वहां पुण्य को आना ही होता है। पुण्य का उदय होता है तो तीर्थंकर के माता-पिता एवं इंद्र आदि हो सकते हैं। शांत परिणाम से ही पुण्य कमाया जाता है। शांत परिणाम होंगे तो परिवार में पुण्य आएगा और पाप नहीं आएगा।
जन्म दिन पर केक काटना जैन कल्चर नहीं
आचार्यश्री ने कहा कि आपका जिस दिन जन्मदिन होता है। उसे दिन आप केक काटते हैं, यह दिगंबर और जैनों का कल्चर नहीं है। जिस दिन आपका जन्मदिन हो, उस दिन अभिषेक करो और जिससे आपका बैर हो, उससे क्षमा मांगो। सही मायने में यह जन्मदिन है। इस अवसर पर चातुर्मास हुए कार्यक्रमों की एक स्मारिका का भी विमोचन किया गया।













Add Comment