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मनुष्य का जीवन पानी की बूंद की तरह : जैन धर्म प्राकृतिक धर्म है – आचार्य विमर्श सागर


बिरले जीव होते हैं वह बूंद की तरह जन्म लेकर ऐसा महान पुरुषार्थ करते हैं कि बूंद को सागर की तरह बना लेते हैं। शेष लोग तो बूंद से जीवन को मिटाकर नई बूंद की तलाश में दुनिया से विदा हो जाते हैं। उक्त उदगार परम पूज्य जिनागम पंथ प्रवर्तक आदर्श महाकवि भावलिंगी संत श्रमणाचार्य श्री विमर्श सागर जी महामुनिराज ने कृष्ण नगर में धर्म सभा को संबोधित करते हुए व्यक्त किए। पढ़िए मनोज जैन नायक की रिपोर्ट…


दिल्ली। यह मनुष्य का जीवन पानी की बूंद की तरह होता है नदी, सरोवर, झील की तरह विशाल नहीं है अपितु पानी की बूंद की तरह अल्प है। इस अल्प जीवन में मनुष्य की परीक्षा होती है कि वह अपने इस बूंद से जीवन को सागर की तरह विशाल कैसे बनाएं। बिरले जीव होते हैं वह बूंद की तरह जन्म लेकर ऐसा महान पुरुषार्थ करते हैं कि बूंद को सागर की तरह बना लेते हैं। शेष लोग तो बूंद से जीवन को मिटाकर नई बूंद की तलाश में दुनिया से विदा हो जाते हैं। उक्त उदगार परम पूज्य जिनागम पंथ प्रवर्तक आदर्श महाकवि भावलिंगी संत श्रमणाचार्य श्री विमर्श सागर जी महामुनिराज ने कृष्ण नगर में धर्म सभा को संबोधित करते हुए व्यक्त किए।

आचार्य श्री ने कहा कि धर्म के बिना जीवन विष का घूंट है धर्म के बिना मनुष्य का मार्ग प्रशस्त नहीं होता धर्म करने वालों को धर्म के स्वरूप का अनुभव करने वालों को दुनिया में कोई मार नहीं सकता क्योंकि धर्म अमर है और उसी धर्म को उन जीवों ने हृदय में धर्म को बसा रखा है और धर्म कभी मरण को प्राप्त नहीं होता जिसके हृदय में धर्म का वास हो उसे दुनिया में कोई भी ताकत मार नहीं सकती धर्मात्मा जीव मृत्यु को भी मार डालते हैं और अपने अमर तत्व को पर्याय में प्रकट कर लेते हैं अमृत्व आत्मा का स्वभाव है जन्म और मरण आत्मा के स्वभाव नहीं पर्याय का परिणमन है।

उन्होंने कहा कि तीर्थंकर देव ने हमें ऐसे प्राकृतिक धर्म से परिचय कराया है जो हमें प्रकृति के साथ जीना सिखाए वह प्राकृतिक धर्म एक मात्र जैन धर्म है संसार में चारों गतियां में जीव का जन्म होता है तो दिगंबर अवस्था में ही होता है यह दिगंबर जैन मुद्रा प्राकृतिक मुद्रा है इस मुद्रा में कोई बनावटी, दिखावटी और माया के प्रपंचों से सहित कार्य वर्जित है इस धरती पर प्रकृति के साथ अगर कोई जीता है वह दिगंबर संत ही जीते हैं। कार्यक्रम दौरान भारी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे। कृष्णा नगर में प्रतिदिन प्रात 8:00 बजे मंगल प्रवचन, दोपहर 3:30 पर स्वाध्याय, संध्या में 6:30 पर भक्ति गंगा, टुडेज सॉल्यूशन और आरती का कार्यक्रम रहेगा।

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