
प्रतापगढ़. कुणाल जैन । वे सांसारिक जीवन की महिला श्रीमती कनकमाला जी के रूप में तपस्वी सम्राट सन्मतिसागर जी के सानिध्य में आई और अंतिम समय में जैनेश्वरी के रूप लेकर समाधिस्थ हो गईं ।
बात बांसवाड़ा के खमेरा क्षेत्र की है । जहां तपस्वी सम्राट सन्मतिसागर जी के परम प्रभावक शिष्य दिव्यतपस्वी,अध्यात्म योगी, राष्ट्रसंत आचार्य श्री सुंदरसागर जी ससंघ प्रवासरत है ।
महाराज श्री के पास 20 दिसंबर को धरियावद निवासी जैन समाज की महिला श्रीमती कनकमाला गनोड़िया को उनके पुत्र श्रीमान आनंद गनोड़िया अपने परिवार सहित लाए और पूज्य आचार्य श्री के चरणों में संबोद्धन किया ।

पूज्य आचार्य श्री को संबोधन के दौरान ही कनकमाला जी के अन्तिमसमय का अनुभव हो गया था । वहीं कनकमाला जी ने महाराज श्री से दीक्षा का निवेदन किया । पूज्य आचार्यश्री ने कुछ दिन रुकने का संकेत दिए ।
22 दिसंबर को उनके पुत्र ने खमेरा श्री समाज के समक्ष और चतुर्विध संघ के समक्ष अपनी माता कनकमाला जी की दीक्षा का निवेदन किया ।
कनकमाला जी की साम्यता और शांत परिणामों को देख कर आचार्य श्री ने उन्हें दिनांक 22.12.2022 को दोपहर 2:00 बजे आर्यिका दीक्षा देकर उन्हें कनकमाला से आर्यिका सुशांतमति माताजी बना तक उनकी दीक्षा की दीर्घकालीन इच्छा को पूरा कर दिया ।
सांयकाल में 7:16 बजे चतुर्विध संघ के सानिध्य में आर्यिका सुशांतमति माता जी ने उत्कृष्ट समाधि मरण साधा । उनके समाधि समय में चतुर्विध संघ और कनकमाला जी के सर्व परिवार जन और श्री समाज खमेरा साक्षी रही । 23 दिसंबर को सुबह सात बजे उनकी डोल यात्रा का समय रहेगा ।












