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जैनाचार्य श्री विनिश्चयसागर महाराज ने धर्मसभा को किया संबोधित : बिना योजना के जीवन सुखी नहीं हो सकता


किसी भी कार्य को सफलता पूर्वक संचालन के लिए योजना बनाई जाती है । बिना योजना बनाए किसी भी कार्य को करना सफलता की गारंटी नहीं हैं । कहने का तात्पर्य यह हैं कि चाहे वह व्यापार हो या वह हमारा जीवन ही क्यों न हो । बगैर योजना के कुछ भी संभव नहीं है। पढ़िए मनोज नायक की रिपोर्ट…


भिंड। किसी भी कार्य को सफलता पूर्वक संचालन के लिए योजना बनाई जाती है। बिना योजना बनाए किसी भी कार्य को करना सफलता की गारंटी नहीं हैं। कहने का तात्पर्य यह हैं कि चाहे वह व्यापार हो या वह हमारा जीवन ही क्यों न हो। बगैर योजना के कुछ भी संभव नहीं है। जिस प्रकार हम कोई भी व्यापार शुरू करने से पहले उसकी पूरी रूपरेखा बनाते हैं, उसी प्रकार हमें अपने जीवन की भी रूपरेखा बनानी चाहिए।

हमारे जीवन का क्या उद्देश्य है, हमें अपने आपको किस ओर ले जाना हैं आदि आदि की लेखा जोखा बनाकर ही आगे बड़ना चाहिए। जीवन को सही तरीके से जीने के लिए योजना अतिआवश्यक है । बिना योजना के जीवन सुखी नहीं बन सकता। यह विचार बाक्केशरी जैनाचार्य श्री विनिश्चयसागर महाराज ने जैन मंदिर भिण्ड में एक धर्मसभा को संबोधित करते हुए व्यक्त किए।

सिर्फ योजनाएं बनाने से कुछ नहीं होगा
जैनाचार्य ने अपने भक्तों से कहा कि एक बात और है कि सिर्फ योजनाएं बनाने से कुछ नहीं होगा। योजनाएं बनाने के बाद उन पर अमल करना भी आवश्यक हैं, उन योजनाओं पर चलना जरूरी है। उन योजनाओं को अपने जीवन में लागू करना होगा। यदि आप सुखी जीवन जीना चाहते हैं तो इन पांच सूत्रों को जीवन में अवश्य अंगीकार करना।

सुखी जीवन के लिए आत्मविश्वास जागृत करें, कार्य के प्रति लगन जगाए, कार्य को अच्छे तरीके से करने का भाव रखें, किसी को कभी भी तकलीफ न दें और अहंकार का त्याग करें। आपका जीवन सुखमय हो जाएगा। आज धर्मसभा के दौरान मुहाना (हरियाणा) में चातुर्मासरत क्षुल्लक श्री प्रज्ञांससागर महाराज के यहां से काफी संख्या में पधारे हुए गुरु भक्तों ने पूज्य आचार्यश्री का पाद प्रक्षालन कर, शास्त्र भेंट किए । पूज्य गुरुदेव ने क्षुल्लक महाराज एवम सभी भक्तों को शुभाशीष प्रदान किया। वर्षा योग समिति द्वारा सभी का सम्मान किया गया।

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