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मंडवाड़ा गांव में खुदाई में प्राप्त हुई जैन तीर्थंकर प्रतिमाएं: मंडवाड़ा गांव डेढ़ हजार वर्ष से अधिक प्राचीन


हाल ही में पिछले सप्ताह बड़वानी जिले की ठीकरी तहसील के ग्राम मंडवाड़ा से 8 जैन प्रतिमाएं प्राप्त हुई थी जिन्हें समाज जन व ग्रामीणों ने प्रसिद्ध दिगम्बर जैन तीर्थ बावनगजा स्थित जैन संग्रहालय में भिजवा दिया है। तारापुर घाट में भी अति प्राचीन जैन मंदिर है वहां भी तीर्थंकर प्रतिमाएं प्राप्त होने की पूरी संभावना है। बदनावर से पढ़िए, यह विशेष रिपोर्ट…


बदनावर इंदौर। हाल ही में पिछले सप्ताह बड़वानी जिले की ठीकरी तहसील के ग्राम मंडवाड़ा से 8 जैन प्रतिमाएं प्राप्त हुई थी जिन्हें समाज जन व ग्रामीणों ने प्रसिद्ध दिगम्बर जैन तीर्थ बावनगजा स्थित जैन संग्रहालय में भिजवा दिया है। यह जानकारी देते हुए वर्द्धमानपुर शोध संस्थान के ओम पाटोदी ने बताया कि इस बारे में जानकारी निकालने पर अंजड निवासी समाजसेवी धर्मेंद्र जैन एवं अभय बोहरा ने बताया कि यहां आसपास के गांवों से आए दिन जैन प्रतिमाएं निकलती रहती है। अभी कुछ महीने पहले ही यहां से भगवान श्री नेमीनाथ स्वामी की एवं पास के ही धनौरा ग्राम से ग्यारहवें तीर्थंकर भगवान श्री श्रेयांसनाथ स्वामी की प्रतिमा प्राप्त हुई थी। बाकानेर निवासी बरखा बड़जात्या ने बताया कि तारापुर घाट में भी अति प्राचीन जैन मंदिर है वहां भी तीर्थंकर प्रतिमाएं प्राप्त होने की पूरी संभावना है।

शासन के भय से मूर्तियां नदी में कर देते हैं प्रवाहित 

यहां के लोग बताते हैं कि मंडवाड़ा गांव से सैकड़ों प्रतिमाएं निकल चुकीं हैं। देवी-देवताओं की प्रतिमाएं स्थानीय मंदिरों में रख देते हैं और अन्य प्रतिमाएं वे नदी में प्रवाहित कर देते उनका कहना है कि यदि मूर्तियां निकलने की बात पुरातत्व विभाग को लगेगी तो उनके निर्माण कार्यों में बाधा आ सकती है। यह ग़लत धारणा के चलते हजारों वर्षों के इतिहास की जानकारी प्रकाश में आने की बजाय पुनः भूमिगत हो जाती है। शासन के द्वारा जनसाधारण को जागरूक करते रहना चाहिए जिससे इतिहास की परतें खुल सके और जनता में व्याप्त अनावश्यक भय समाप्त हो सकें। पाटोदी ने बताया कि हाल ही में जो आठ प्रतिमाएं प्राप्त हुई। उनमें भगवान पार्श्वनाथ जी के अलावा तीर्थंकर यक्ष रक्षिणी एवं अन्य तीर्थंकर प्रतिमाएं हैं। इनमें एक बड़ी प्रतिमा जो लगभग 8-10 फ़ीट की है वह पंचबालयति तीर्थंकर प्रतिमा है। धर्मेंद्र जैन के अनुसार यहां पर अधिकतर पंचबालयति प्रतिमाएं प्राप्त होती है। मंडवाड़ा से प्राप्त 1000 वर्ष पूर्व के शिलालेख अनुसार इस नगर का प्राचीन नाम मदनपुर रहा है। जहां पूर्व में हजारों की जैन बस्ती होने का अनुमान है क्योंकि, वर्तमान में भू-गर्भ से यहां पर सैकड़ो प्रतिमाएं प्राप्त होती है, जो लगभग 1500 से 1700 वर्ष प्राचीन होती हैं। वहीं कुछ प्रतिमा परमार कालीन भी प्राप्त होती है।

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