राष्ट्रीय अल्पसंख्यक शिक्षण संस्था आयोग (एनसीएमईआई) के अध्यक्ष न्यायमूर्ति नरेन्द्र कुमार जैन बीते 03-04 मार्च को इंदौर आए थे। चार मार्च की सुबह हंसमुख गांधी परिवार के सौजन्य से समाज द्वारा आयोजित स्वागत समारोह को संबोधित करते न्यायमूर्ति जैन ने कहा कि भारतीय संविधान में धार्मिक एवं भाषायी अल्पसंख्यक को अपनी भाषा, संस्कृति, पुरातत्व, धर्म, धर्मायतनों एवं सांस्कृतिक स्थलों की सुरक्षा के लिए अनेक अधिकार प्रदान किए गए हैं किन्तु जैन समाज इन अधिकारों से परिचित न होने के कारण इनका लाभ नहीं ले पा रहा है। पढ़िए डॉ अनूपम जैन की विशेष रिपोर्ट…
इंदौर। भारत सरकार द्वारा देश के अल्पसंख्यक समुदाय की शिक्षण संस्थाओं को संरक्षण देने के भाव से गठित राष्ट्रीय अल्पसंख्यक शिक्षण संस्था आयोग (एनसीएमईआई) के अध्यक्ष न्यायमूर्ति नरेन्द्र कुमार जैन बीते 03-04 मार्च को इंदौर आए थे। चार मार्च की सुबह हंसमुख गांधी परिवार के सौजन्य से समाज द्वारा आयोजित स्वागत समारोह को संबोधित करते न्यायमूर्ति जैन ने कहा कि भारत विविधताओं से भरा हुआ देश है। अनेकता में एकता ही इसकी विशेषता है। भारतीय संविधान में धार्मिक एवं भाषायी अल्पसंख्यक को अपनी भाषा, संस्कृति, पुरातत्व, धर्म, धर्मायतनों एवं सांस्कृतिक स्थलों की सुरक्षा के लिए अनेक अधिकार प्रदान किए गए हैं किन्तु जैन समाज इन अधिकारों से परिचित न होने के कारण इनका लाभ नहीं ले पा रहा है।
जैन ने उदाहरण देते हुए बताया कि एक व्यक्ति सुरेशचन्द्र जैन ने संविधान में प्रदत्त अल्पसंख्यक समुदाय के अधिकारों का उपयोग करते हुए तीर्थंकर महावीर विश्वविद्यालय (टीएमयू), मुरादाबाद जैसा प्रतिष्ठित विश्वविद्यालय खड़ा करा दिया, जिसने कोरोना काल में उस अंचल के लोगों की महती सेवा की। वह यहां उपस्थित जैन समाज के लोगों को यह परामर्श देना चाहते हैं कि अपने धर्म, संस्कृति एवं समाज की संस्थाओं, मंदिर, कॉलेज, स्कूल, स्मारकों पर संकट के समय आप अपनी अपील आयोग के संज्ञान में लाएं तथा समुचित संरक्षण प्राप्त करें। अल्पसंख्यक समुदाय से संबद्ध दोनों आयोगों को न्यायालयीन शक्तियां प्राप्त हैं।

कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए मध्यप्रदेश उच्च न्यायालय के सेवानिवृत्त न्यायाधीश न्यायमूर्ति जे. के. जैन ने कहा कि यह हमारे लिए सौभाग्य की बात है कि एनसीएमईआई के चेयरमैन के पद पर न्यायमूर्ति एन.के. जैन साहब प्रतिष्ठित हैं। हमें उनके अनुभव, ज्ञान एवं सामाजिक संस्थाओं को संरक्षण देने की जिजीविषा का लाभ देते हुए त्वरित कार्यवाही करते रहने चाहिए। न्यायमूर्ति एन. के. जैन का इंदौर की संस्थाओं एवं जनता की ओर से अभिनंदन और स्वागत भी किया। कार्यक्रम का संचालन देवी अहिल्या विश्वविद्यालय के जैन गणित शोध केन्द्र के निदेशक एवं आचार्य डॉ. अनुपम जैन ने किया तथा परिचय रजनीकांत गांधी ने दिया। इस अवसर पर हंसमुख गाधी, रजनीकांत गाधी, डॉ. अनुपम जैन, स्वाति गाधी, न्यायमूर्ति जे. के. जैन आदि ने न्यायमूर्ति एन. के. जैन को दि. जैन तीर्थ निर्देशिका की प्रति भेंट की।
कार्यक्रम में पुष्पा कासलीवाल, एन. के. जैन की पत्नी, राजकुमार पाटोदी, कमलेश कासलीवाल, टी. के. वेद, अनिल रावत, सुशील पांड्या सहित जैन समाज की विभिन्न संस्थाओं के शताधिक प्रतिनिधि एवं पदाधिकारी मौजूद थे। सम्मान समारोह के बाद जलपान का आयोजन गांधी परिवार द्वारा किया गया। कार्यक्रम में दिगम्बर जैन सामाजिक संसद, महावीर ट्रस्ट, दिगम्बर जैन सोशल ग्रुप फेडरेशन, दि. जैन महासभा, दि. जैन महासमिति, पावागिर ऊन ट्रस्ट, जैसवाल जैन समाज ट्रस्ट, दि. जैन समाज सुदामानगर, कल्पतरु दि. जैन मंदिर, जीआईटीओ, परवार सभा, जेईएस, ऋषभदेव गौरव न्यास आदि संस्थाओं के शताधिक प्रतिनिधि मौजूद थे। अनेकों प्रतिनिधियों ने अपनी जिज्ञासाएं रखकर उनका समाधान भी प्राप्त किया। सभी प्रतिनिधियों ने इस उपयोगी आयोजन के लिए गांधी परिवार के प्रति धन्यवाद ज्ञापित किया।













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