मुनि श्री आज्ञा सागर जी गुरुदेव की संगत आर्यिका सुवर्ण श्री माताजी का गांव गनोड़ा नगरी में समाधि मरण बीते 14 जुलाई को हो गया था। सुवर्ण श्री माताजी मूलतः भीलूड़ा गांव के रहने वाली थीं। जैन समाज भीलूड़ा द्वारा जैनमंदिर भीलूड़ा में 105 श्री सुवर्ण श्री माताजी का संल्लेखना पूर्वक समाधि मरण होने के उपलक्ष्य में उन्हें विनयांजलि देने के लिए सभी समाज के पुरुष, महिलाएं, बच्चे, धर्म सभा में उपस्थित हुए। पढ़िए धर्मेंद्र जैन की रिपोर्ट…

भीलूड़ा। मुनि श्री आज्ञा सागर जी गुरुदेव की संगत आर्यिका सुवर्ण श्री माताजी का गांव गनोड़ा नगरी में समाधि मरण बीते 14 जुलाई को हो गया था। सुवर्ण श्री माताजी मूलतः भीलूड़ा गांव के रहने वाली थीं। जैन समाज भीलूड़ा द्वारा रात्रि 8:00 बजे जैनमंदिर भीलूड़ा में 105 श्री सुवर्ण श्री माताजी का संल्लेखना पूर्वक समाधि मरण होने के उपलक्ष्य में उन्हें विनयांजलि देने के लिए सभी समाज के पुरुष, महिलाएं, बच्चे, धर्म सभा में उपस्थित हुए और धर्म प्रभावना की अनुमोदना की।
सर्वप्रथम उनके सांसारिक जीवन के परिवार जनों ने दीप प्रज्वलन कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया। जैन समाज अध्यक्ष अरविंद शाह ने बताया कि माताजी भीलूड़ा का गौरव थीं। माता जी का धर्म के रास्ते पर चलकर मोक्ष प्राप्त करना हमारे सबके लिए बहुत ही खुशी का विषय है। इसी क्रम में उनके सांसारिक जीवन के बड़े बेटे ओमप्रकाश भरड़ा ने अपने माता जी के जीवन काल की साधना और तप के बारे में विस्तृत रूप से बताया। इसके साथ ही उनके छोटे पुत्र हितेश भरड़ा द्वारा माता जी के द्वारा शुरू से ही धर्म के प्रति आकर्षण और उनके द्वारा परिवार में किए गए संकल्प व विधान व्रत के बारे में विस्तृत जानकारी दी।
मेघा जैन, टीना जैन, उनकी पुत्री निर्मला जैन द्वारा भी शब्द सुमन द्वारा विनयांजलि अर्पित की गई। श्रीपाल जैन द्वारा भी माता जी के जीवनकाल पर प्रकाश डाला गया। इसके साथ ही पंडित धनपाल जी शाह ने कहा कि धर्म का यह रास्ता श्रेष्ठ है और माताजी को हमेशा याद रखा जाएगा। परिवार द्वारा दान राशि निकाली गई। कार्यक्रम के प्रारंभ में सर्वप्रथम मंगलाचरण सुषमा जैन द्वारा किया गया। संचालन धर्मेंद्र जैन ने किया।














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