अंबाह में वर्षा और ठंडी हवाओं के बावजूद दिगंबर जैन संतों का पोरसा की ओर पदविहार जारी रहा, श्रद्धालु भी त्रिपाल से छाया देकर साथ चल रहे हैं। पढ़िए पूरी रिपोर्ट…
अंबाह। (अंबाह) इन दिनों लगातार हो रही वर्षा और सर्द हवाओं के बीच भी दिगंबर जैन संतों की अद्भुत आस्था और तप की साधना देखने को मिल रही है। कठोर संयम और दृढ़ संकल्प के प्रतीक मुनि श्री विलोक सागर जी महाराज एवं मुनि श्री विबोध सागर जी महाराज प्रतिकूल मौसम की परवाह किए बिना पोरसा की ओर पदविहार कर रहे हैं।
वर्षा के बीच त्रिपाल से बचाकर साथ चल रहे भक्त
मंगलवार को भीषण वर्षा और ठंड के बावजूद संतों का विहार अनवरत जारी रहा। भक्तों ने बताया कि हमने प्लास्टिक त्रिपाल को छाता का रूप देकर संतों को वर्षा से बचाने का प्रयास किया। संत अत्यंत शांत भाव से नंगे पांव अपने गंतव्य की ओर विहार करते रहे।
दिगंबर संतों की जीवनशैली अनुशासन और तपस्या का प्रतीक
जैन धर्म में दिगंबर संतों का जीवन पूर्णतः संयम, त्याग और अहिंसा पर आधारित होता है। वे किसी परिस्थिति में वाहन का उपयोग नहीं करते और सदैव पैदल विहार करते हैं। उनका जीवन आत्मशुद्धि और आध्यात्मिक सिद्धि का उदाहरण है।
अंबाह नगर ने किया भावपूर्ण स्वागत
अंबाह आगमन पर परेड चौराहा स्थित जैन मंदिर में श्रद्धालुओं ने भावनापूर्ण स्वागत किया। महिलाओं, बच्चों और बुजुर्गों ने पुष्पवृष्टि कर संतों से आशीर्वचन प्राप्त किए।
प्रवचन में संयम और अहिंसा का संदेश
मुनि श्री विलोक सागर जी ने कहा कि “वास्तविक सुख भोग में नहीं, बल्कि संयम और आत्मबल में है।” वहीं मुनि श्री विबोध सागर जी ने विपरीत परिस्थितियों में भी धैर्य बनाए रखने को सच्ची साधना बताया।
पोरसा की ओर जारी रहेगा संतों का पदविहार
समाजजनों ने कहा कि संतों का यह विहार केवल धार्मिक यात्रा नहीं, बल्कि संयम, सादगी और अनुशासन का प्रेरणापथ है। आज संतों का पड़ाव पोरसा में होगा, जहां धर्मसभा आयोजित की जाएगी।













Add Comment