समाचार

थार के दिल से सुनहरी यादों तक — जैन जीनियस ग्रुप की स्वर्ण नगरी यात्रा शानदार रूप से सम्पन्न: जैसलमेर, जोधपुर, कुंभलगढ़ के ऐतिहासिक–आध्यात्मिक मिलन ने यात्रियों के दिलों में बसाईं अविस्मरणीय स्मृतियाँ


इंदौर दिगंबर जैन सोशल ग्रुप जीनियस द्वारा 17 से 24 नवम्बर 2025 तक आयोजित स्वर्ण नगरी यात्रा में जैसलमेर, जोधपुर और कुंभलगढ़ की कला, संस्कृति, अध्यात्म व रोमांच का अनूठा अनुभव मिला। शुरुआत से समापन तक यात्रा उत्साह और सामूहिकता से भरी रही। 


इंदौर दिगंबर जैन सोशल ग्रुप जीनियस की स्वर्ण नगरी थार के दिल से — 8 दिन की राजस्थान यात्रा, 17 नवम्बर से 24 नवम्बर 2025 तक, रोमांच, संस्कृति और अध्यात्म का ऐसा संगम लेकर आई कि हर यात्री की डायरी यादों से चमक उठी।

इस पूरी यात्रा के सूत्रधार रहे — विजय इंदिराजी बडजात्या (संस्थापक संरक्षक), संजय बरखा बडजात्या (अध्यक्ष), जितेन्द्र रानू पोरवाल (सचिव), और राकेश मीनल पाटनी (प्रमुख यात्रा संयोजक) — जिनकी शानदार प्लानिंग के कारण हर दिन अलग उत्साह देखने को मिला।

यात्रा में हर दिन की शुरुआत नित्य नियम पूजा और शाम को सामयिक से होती थी

17 नवम्बर को इंदौर रेलवे स्टेशन से यात्रा की शुरुआत हुई। सुबह जैसे ही उदयपुर पहुँचे, मनोज गदिया, दीपक गदिया और विनोद शाह के द्वारा चाय–कॉफी, उकाली, बिस्किट और हैम्पर गिफ्ट के साथ जो स्वागत हुआ — सबके चेहरे खिल गए। आगे की जानकारी देने के लिए इंद्रकुमार सेठी यात्रा में शामिल हुए, जिनका भी गर्मजोशी से स्वागत किया गया।

18 नवम्बर का दिन रणकपुर के भव्य मंदिर दर्शन और फिर नीली नगरी जोधपुर के मेहरानगढ़ किला, मंडोर गार्डन और जसवंत थड़ा के ऐतिहासिक नज़ारों में डूबा रहा।

19 नवम्बर रामदेवरा दर्शन, जैसलमेर वॉर म्यूज़ियम की देशभक्ति, और शाम को डेजर्ट कैम्प में राजस्थानी लोकनृत्य और संगीत के साथ जब रेगिस्तान गूँजा — यात्रियों ने जीवन का असली “डेजर्ट मैजिक” महसूस किया।

20 नवम्बर कुलधरा का रहस्यमय गाँव, तनोट माता मंदिर और लॉन्गेवाला पोस्ट — 1971 युद्ध की वीरगाथा — सभी के दिलों को झकझोर गई।

21 नवम्बर सुनहरी नगरी जैसलमेर — जैन मंदिरों की कलात्मक नक्काशी, जैसलमेर किला, पटवों की हवेली, महाराजा पैलेस और गडीसर झील… पूरा दिन इतिहास और सौन्दर्य में डूबा रहा।

 22–23 नवम्बर जैसलमेर से कुंभलगढ़ — विश्व की दूसरी सबसे लंबी दीवार वाले फोर्ट का भ्रमण, जीप सफारी, परशुराम महादेव और हमीरपार लेक के साथ यात्रियों ने अलग ही आनंद लिया। 23 की रात ट्रेन से इंदौर वापसी और 24 नवम्बर को यात्रा का समापन — लेकिन दिल यात्रा में ही रह गया।

यात्रा के हमसफ़र: मीडिया प्रभारी रेखा जैन ने बताया कि दिलीप प्रमिला पाटनी, संजय बरखा बडजात्या, टीके मंजू वेद, राकेश मीनल पाटनी, जितेंद्र रानू पोरवाल, अनिल सीमा जैन, इंद्रकुमार वीणा सेठ, शरद रेखा जैन, अशोक ममता खासगीवाल, अजय ज्योति सेठी, रितेश वीणा जैन, संजय आराधना कागदी, पंकज प्रियंका जैन, डॉ कुश नीता बंडी, रवि सोनाली बडजात्या, मयंक मेघा अजमेरा, गजेंद्र रेणु जैन, संजय रेखा जैन, अमित टीना गोधा, अक्षय दीपा जैन, कुशलराज जैन, भानु कुमार वेद, वीणा शाह, जयंती जैन, राजकुमार वर्षा काला इस सुनहरी यात्रा के साथी रहे।

यात्रा समाप्त हुई, पर अनुभवों का सफ़र यहीं नहीं रुका — सबके चेहरों पर चमक और दिल में एक ही वाक्य था: “ऐसी यात्राएँ ज़िंदगी में बार–बार नहीं मिलती।”

आप को यह कंटेंट कैसा लगा अपनी प्रतिक्रिया जरूर दे।
+1
2
+1
0
+1
0
Shreephal Jain News

About the author

Shreephal Jain News

Add Comment

Click here to post a comment

You cannot copy content of this page