श्रीमहावीरजी महामस्तकाभिषेक समाचार

स्फटिक मणि प्रतिमा की वेदी को स्वर्ण सज्जित किया जाएगा

इंदौर -राजेश जैन दद्दू \  श्रुत संवेगी मुनिश्री आदित्य सागर जी महाराज ने मंगलवार को समोसरण मंदिर में चातुर्मास की अंतिम देशना देते हुए कहा कि समोसरण मंदिर में विराजित विश्व की सबसे बड़ी स्फटिक मणि की प्रतिमा की स्थापना किसी सामान्य जीव की प्रतिमा की स्थापना नहीं, जैन धर्म के 16 वें तीर्थंकर शांतिनाथ भगवान की प्रतिमा की स्थापना है जो युगों युगों तक जिन शासन की प्रभावना करेगी और भक्तों के हृदय में सुख शांति की धारा बहाएगी।


मुनि श्री ने प्रवचन देते हुए भक्तों के समक्ष अपने मन की भावना उद्घाटित करते हुए कहा कि तीन लोक के नाथ भगवान शांतिनाथ को आपने जिस वेदी पर विराजमान किया है वह मार्बल की नहीं स्वर्ण की होना चाहिए थी इतना सुनते ही उपस्थित कुछ महिला पुरुषों ने अपने स्वर्ण आभूषण(अंगूठी, चैन, चूड़ियां, हार और कानों के कुंडल आदि) उतारकर अधिकृत व्यक्ति को दे दिए, कुछ ने 5 ग्राम से लेकर 200 ग्राम सोना अथवा उतने मूल्य की राशि देने की स्वीकृति प्रदान की इनमें पंडित रतन लाल जी शास्त्री, ब्रह्मचारिणी लीला बहन, आजाद अमित जैन, मनोज बाकलीवाल, हंसमुख गांधी, अशोक खासगीवाला, अतिशय जैन एवं श्रीमती मनोरमा डॉक्टर जैनेंद्र जैन आदि प्रमुख हैं।

इस अवसर पर श्री अरुण योगेंद्र सेठी परिवार द्वारा प्रदत 2 किलो चांदी का हीरे, मोती, माणिक जडित छत्र प्रतिमा के मस्तक पर चढाने का सौभाग्य श्री नरेंद्र कुमार
डॉ दीपक जैन बीड़ी वाला परिवार ने प्राप्त किया। पश्चात प्रतिमा का स्वर्ण रजत कलशों से सैकड़ों श्रद्धालुओं ने अभिषेक कर पुण्यार्जन किया। प्रतिमा का प्रत्येक माह की पूर्णिमा पर अभिषेक एवं प्रतिवर्ष एक जनवरी को
महामस्तकाभिषेक होगा ।

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