* 20 दिसंबर* : आचार्य पद पर प्रतिष्ठापन दिवस आज
सारांश – मुनि जीवन में आचार्य का पद बहुत सम्मानीय है लेकिन इसके लिए साधना, अनुशासन व सम्यक् जीवन में कड़ी परीक्षाओं से गुजरना होता है । इसीलिए आचार्य पद पर प्रतिष्ठापन दिवस का अवसर संत और उनके अनुयायियों के लिए किसी पर्व से कम नहीं । आज आचार्य श्री 108 अतिवीर जी मुनिराज का आचार्य पद पर प्रतिष्ठापन दिवस है । जानिए, मुनिराज का जीवन चरित…
– समीर जैन, दिल्ली – यह श्री 108 अतिवीर जी महाराज की विशेष योग्यता, दिव्यता,संगठन व संचालन कुशलता का ही सुखद परिणाम है कि मुनिराज को श्रमण परंपरा के वर्तमान में सर्वोच्च पद “आचार्य पद” पर प्रतिष्ठित करने की घोषणा हुई । इस घोषणा से सभी भक्त प्रफुल्लित हैं ।
आचार्य श्री की छलछलाती मंद-मंद मुस्कान हर बाल-वृद्ध को अपनी ओर सहज ही आकर्षित कर लेती है । लगभग 26 वर्षों की सतत संयम साधना से फलीभूत अथाह ज्ञान भंडार, तप-त्याग-साधना, समाज-उद्धारक मानसिकता, स्व-पर कल्याण की भावना, एकता व संगठन, साधर्मी वात्सल्य, गंभीर चिंतन, धैर्य आदि अनेकों योग्य गुणों से सराबोर आचार्य श्री को लेकर संत समाज व भक्तगण आश्वस्त हैं कि वे जैन धर्म के वाङ्ग्मय में एक प्रखर प्रकाश पुंज की भांति दैदीप्यमान नक्षत्र बनकर जगमगाएंगे ।
इस गौरवशाली परंपरा के वाहक हैं आचार्य श्री
– प्रशममूर्ति आचार्य श्री 108 शान्तिसागर जी महाराज (छाणी)
– आचार्य श्री पंचम पट्टाधीश परम पूज्य गुरुवर आचार्य श्री 108 विद्याभूषण सन्मति सागर जी महाराज
– परम पूज्य सल्लेखनारत आचार्य श्री 108 मेरु भूषण जी महाराज
इस अवसर पर एलाचार्य पूज्य आचार्य श्री ने कहा कि आपके द्वारा अल्पसमय में ही अभूतपूर्व ज्ञान-गंगा का प्रवाह निरंतर गतिमान है तथा विभिन्न नगरों में व्यापक धर्म प्रभावना संपन्न हो रही है ।
गुरुवर आचार्य श्री 108 विद्याभूषण सन्मति सागर जी महाराज द्वारा दीक्षित समस्त शिष्य समुदाय में आप एकमात्र ऐसे शिष्य हैं जिन्हें उन्होंने स्वयं अपने कर-कमलों द्वारा कोई पद प्रदान किया है। एलाचार्य पद के पश्चात् गुरुवर द्वारा आपको आचार्य पद से भी सुशोभित किया जाना था परन्तु अचानक ही उनके समाधिमरण हो जाने से यह कार्य अधूरा रह गया ।
गुरूजी की भावना के अनुरूप गुरुभ्राता द्वारा अधूरा कार्य पूर्ण हुआ| गहन चिंतक, विचारक, प्रवचनकार व कुशल मार्गदर्शक के रूप में आपने अल्पसमय में ही जैन समाज को नयी दिशा प्रदान करने की सार्थक पहल की ।
आप हर उस कार्य को सहजता से कर लेते हैं, जिसके लिए जैन समाज एक सही नेतृत्व का इंतज़ार करता रह जाता है । युवा पीढ़ी को कुशलतापूर्वक सही दिशा में अग्रसर करने में आपके हर कदम पर हज़ारों युवा चलने को तैयार हो जाते हैं ।
आने वाला कल जिनके हाथों में है, उनको सही दिशा में आगे बढ़ाने की कला के भण्डार हैं । स्पष्ट सोच, स्वच्छ कार्यप्रणाली, निश्चित दिशा, हर विचार को यथार्थ में सहजता से अग्रसित कर देती है| आपके द्वारा विभिन्न प्रसंगों पर किये गए उत्कृष्ट कार्य श्रमण व श्रावक के लिए प्रेरक उदाहरण हैं ।
आपकी इन्हीं विलक्षण प्रतिभा व विशेषताओं को देखते हुए छाणी परंपरा के द्वितीय पट्टाधीश परम पूज्य आचार्य श्री 108 विजय सागर जी महाराज के समाधि दिवस के प्रसंग पर आपके गुरुभ्राता परम पूज्य सल्लेखनारत आचार्य श्री 108 मेरुभूषण जी महाराज ने दिनांक 20 दिसम्बर 2020 को एम. डी. जैन कॉलेज, हरीपर्वत, आगरा (उ.प्र.) में हजारों गुरुभक्तों के समक्ष तथा अखिल भारतवर्षीय दिगम्बर जैन शास्त्री परिषद् के विद्वानों की अनुमोदना के साथ विधि-विधान पूर्वक आचार्य पद पर प्रतिष्ठित किया । परम पूज्य आचार्य श्री 108 अतिवीर जी मुनिराज के श्रीचरणों में द्वितीय आचार्य पद प्रतिष्ठापन दिवस के पुनीत अवसर पर शत-शत नमन…












