इंदौर। अंतर्मुखी मुनि श्री पूज्य सागर महाराज ने संविद नगर, कनाडिया रोड स्थित श्री आदिनाथ दिगंबर जैन मंदिर में धर्मसभा को संबोधित करते हुए कहा कि व्यक्ति को दृष्टि बदलनी चाहिए क्योंकि ऐसा हो तो सृष्टि बदल जाती है। दूसरों के विचार-सोच बदलने की बजाए अपने आप को बदल लेना चाहिए। सब अपने-अपने कर्मों का फल भोगते हैं। जरा सोचिए, तो कैसे हम दूसरों को बदल सकते हैं। इससे अच्छा है कि हम अपने आप को बदल लें। सीता जी ने कर्म की दृष्टि से देखा, इसीलिए श्रीराम के लिए भी यही संदेश दिया कि मुझे छोड़ा है तो कोई बात नहीं लेकिन आप धर्म को मत छोड़ना, नहीं तो दुख, कष्ट, संकट जीवन में आ जाएंगे।
आज हम अपनी-अपनी दृष्टि से चल रहे हैं। इसलिए दुखी हो रहे हैं। हमें जिनवाणी की दृष्टि से चलना चाहिए, तभी हम आत्म कल्याण कर सकते हैं और विवादों से बच सकते हैं। दृष्टि यही रखनी चाहिए कि मेरे साथ जो हो रहा, उसमें कोई दोषी नहीं बल्कि जिनके निमित्त से दुख आए उसे धन्यवाद देना चाहिए कि तुम्हारे निमित्त से आज एक अशुभ कर्म निकल गया।
ये कार्यक्रम भी हुए
इससे पहले मुनि श्री का पाद प्रक्षलान राजेंद्र, सतीश, विक्रम, राजावत परिवार ने किया। शास्त्र भेंट राजेश जैन (जैन दूध भंडार) ने किया । धर्म सभा में उपस्थित नरेन्द्र वेद का समाज की ओर से सम्मान किया गया । धर्म सभा का संचालन समाज अध्यक्ष एल. सी. जैन ने किया । इस मौके पर तल्लीन बड़जात्या (पारस चैनल), पवन मोदी, वीरेन्द् जैन, पप्पन, महावीर सेठ, आनंद पहाड़िया मौजूद रहे।













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