श्री शांतिनाथ दिगंबर जैन मंदिर में धर्मप्रेमियों के लिए अत्यंत हर्ष और गौरव का विषय है कि यहां भव्यातिभव्य श्री आदिनाथ जिनबिम्ब के अवसर पर पंचकल्याणक प्रतिष्ठा महोत्सव एवं विश्वशांति महायज्ञ आयोजित किया जा रहा है। सलेहा से पढ़िए, अभिषेक अशोक पाटील की यह खबर…
सलेहा। श्री शांतिनाथ दिगंबर जैन मंदिर में धर्मप्रेमियों के लिए अत्यंत हर्ष और गौरव का विषय है कि यहां भव्यातिभव्य श्री आदिनाथ जिनबिम्ब के अवसर पर पंचकल्याणक प्रतिष्ठा महोत्सव एवं विश्वशांति महायज्ञ आयोजित किया जा रहा है। आर्यिका श्री विंध्यश्री माताजी ने कहा कि सलेहा दिगंबर जैन मंदिर में चल रहे पंचकल्याणक के क्रम में शुक्रवार को भगवान का दीक्षा कल्याणक हुआ। बीते तीन दीन गर्भ और जन्म कल्याणक की खुशियों के बीच शुक्रवार को चौथे दिन दीक्षा कल्याणक के साथ भगवान को जीवन की कठोरताओं का सामना करते देखना उन्हें भावुक करने वाला रहा। बड़ा बनने अथवा भगवान बनने के लिए बहुत कुछ खोना भी पड़ता है। मानवता के सर्वाेच्च शिखर सिद्ध होने वाले प्रथम तीर्थंकरों के भी जीवन से यह तथ्य प्रतिष्ठित है। उन्होंने यूं ही नहीं परमपद प्राप्त किए, बल्कि इसके पीछे उनकी अप्रतिम एवं सुदीर्घ साधना थी। जन्म कल्याणक के बाद न केवल प्रथम तीर्थंकर की प्रतिमा को, बल्कि प्रतिष्ठा के लिए तैयार अन्य तीर्थंकरों तथा जैन धर्म के और प्रेरक-प्रतीकों की एवं अन्य प्रतिमाओं को नई पोशाक धारण कराकर उत्सव मनाया गया।
आध्यात्मिक जागरण और धर्मप्रभावना का विराट उत्सव बना
मुनि श्री सर्वार्थ सागर महाराज जी ने कहा कि क्षेत्र में इस ऐतिहासिक आयोजन को लेकर उत्साह, श्रद्धा और भक्ति का वातावरण व्याप्त है। आयोजक समिति ने सभी श्रद्धालुओं से अधिकाधिक संख्या में उपस्थित होकर पुण्य लाभ अर्जित करने का आग्रह किया है। मुनिश्री सर्वार्थ सागरजी महाराज की भक्त शिवानी जैन ने कहा कि यह महा महोत्सव आर्यिका विंध्य श्री माता जी की पावन प्रेरणा तथा आचार्यश्री विशुद्ध सागर जी के मंगल आशीर्वाद एवं सान्निध्य में हुआ है। आचार्य श्री विशुद्ध सागर जी के सान्निध्य से यह आयोजन न केवल धार्मिक अनुष्ठान रहेगा, बल्कि आध्यात्मिक जागरण और धर्म प्रभावना का विराट उत्सव बना। महोत्सव के अंतर्गत विधिपूर्वक पंचकल्याणक प्रतिष्ठा, विविध धार्मिक अनुष्ठान, प्रवचनमाला तथा विश्व शांति महायज्ञ किया गया। इस पावन अवसर पर देश-प्रदेश से संत-साधु, विद्वान एवं श्रद्धालु सलेहा पहुंचकर धर्मलाभ प्राप्त कर रहे हैं।













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