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जैन धर्म में रिसर्च को जन-जन तक पहुँचाना हमारा कर्तव्य - मुनि पूज्यसागर महाराज : राष्ट्रीय संगोष्ठी के दूसरे दिन प्राकृत वाङ्मय और संस्कृति संरक्षण पर हुआ गहन मंथन


कुंदकुंद ज्ञानपीठ, इंदौर में आयोजित राष्ट्रीय संगोष्ठी के दूसरे दिन मुनि श्री पूज्यसागर महाराज ने जैन धर्म में हो रहे शोध को समाज तक पहुँचाने पर जोर दिया। प्राकृत वाङ्मय और सिरि भूवलय पर विद्वानों ने गंभीर विमर्श किया। पढ़िए श्रीफल जैन न्यूज़ की विशेष रिपोर्ट…..


जब शोध साधना बने और साधना जन-जन तक पहुँचे, तभी धर्म जीवंत होता है।

इंदौर, श्री दिगंबर जैन उदासीन आश्रम ट्रस्ट एवं कुंद-कुंद ज्ञानपीठ, इंदौर के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित द्विदिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी के द्वितीय दिन रविवार को आध्यात्मिक और बौद्धिक विमर्श का सशक्त वातावरण देखने को मिला। अंतर्मुखी मुनि श्री पूज्यसागर जी महाराज के सान्निध्य में प्रथम सत्र का शुभारंभ उमंग जैन के मंगलाचरण से हुआ। अतिथियों ने दीप प्रज्वलन कर सत्र की औपचारिक शुरुआत की।

मुनि श्री का प्रेरक संदेश

मुनि श्री पूज्यसागर महाराज ने अपने संबोधन में कहा कि “जैन धर्म में जो भी शोध हो रहा है, उसे जन-जन तक पहुँचाना हमारा कर्तव्य है।”

उन्होंने कहा कि धर्म के शोध से निकले सूत्रों में से यदि एक भी सूत्र जीवन में उतर जाए, तो जीवन सहज और आसन बन जाता है।

प्राकृत भाषा पर लघु नाटिका

प्रथम सत्र में प्राकृत भाषा पर आधारित लघु नाटिका का मंचन उमंग जैन, रंजना पटोरिया, शोभा जैन एवं अंजना जैन द्वारा किया गया, जिसे उपस्थित जनसमूह ने सराहा।

गरिमामयी अतिथि उपस्थिति

सत्र की अध्यक्षता कालिदास अकादमी के निदेशक डॉ. गोविंद गंधेय ने की।

मुख्य अतिथि डॉ. अशोक जेटावत (उदयपुर), सारस्वत अतिथि डॉ. कल्पना जैन (दिल्ली) रहे।

विशिष्ट अतिथियों में इंजीनियर अनिलकुमार जैन, डॉ. अनुपम जैन, डॉ. आशीष जैन, उमंग सिंह तोमर, डॉ. पंकज शास्त्री, डॉ. मुकेश जैन विमल, डॉ. मीनाक्षी जैन, डॉ. रेणु जैन, कीर्ति पांड्या एवं विनीता जैन मंचासीन रहे।

प्राकृत वाङ्मय और सिरि भूवलय पर विमर्श

रंजना पटोरिया ने प्राकृत वाङ्मय को सरल और विस्तृत रूप में प्रस्तुत किया। इस सत्र में सिरि भूवलय में ॐ के स्थान, भारत एवं विदेशों के विश्वविद्यालयों में जैन अध्ययन जैसे विषयों पर विशद मीमांसा की गई।

द्वितीय सत्र में अलौकिक सिरि भूवलय

द्वितीय सत्र में अद्वितीय एवं अलौकिक सिरि भूवलय विषय पर रंजना पटोरिया, अभय बंडी, अंजना जैन, डॉ. शोभा जैन, पूनम जैन, डॉ. अंजलि सुनील शाह एवं श्रेयांस कुमार जैन ने तथ्यात्मक और शोधपरक विचार प्रस्तुत किए।सत्र का संचालन डॉ. यतीश जैन ने किया।

सम्मान एवं सहभागिता

सभी अतिथियों का सम्मान ट्रस्ट अध्यक्ष अमित कासलीवाल एवं पदाधिकारियों द्वारा किया गया।

कार्यक्रम में डी.के. जैन (रिटायर्ड डीएसपी), हेमंत जैन काका, डॉ. जैनेंद्र जैन, रेखा संजय जैन, सम्यक जैन, वर्णित जैन, विनोद जैन, हितेश जैन सहित अनेक गणमान्यजन उपस्थित रहे।

बालिका को मिला आशीर्वाद

इस अवसर पर सनावद से आई गुरु भक्त बालिका गवाक्षी जैन ने अपने जन्मदिन पर मुनि श्री से आशीर्वाद प्राप्त किया। मुनि श्री ने गवाक्षी को काव्यात्मक आशीर्वाद का सचित्र पत्र प्रदान कर उसके उज्ज्वल भविष्य की मंगलकामना की।

शोध जब जन-जन तक पहुँचे, तभी संस्कृति सुरक्षित और धर्म सशक्त बनता है।

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