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इंदौर बना भारत का पहला मानसिक स्वास्थ्य के प्रति जागरूक शहर : आत्महत्या रोकथाम दिवस पर समाज कार्य महाविद्यालय ने किया आंदोलन की शुरुआत


इंदौर समाजकार्य महाविद्यालय ने 10 सितम्बर को विश्व आत्महत्या रोकथाम दिवस पर एक विशेष कार्यक्रम आयोजित कर मानसिक स्वास्थ्य जागरूकता आंदोलन की शुरुआत की। इस पहल से इंदौर को भारत का पहला मानसिक स्वास्थ्य के प्रति जागरूक शहर बनाने का लक्ष्य रखा गया है। पढ़िए पूरी रिपोर्ट…


इंदौर। विश्व आत्महत्या रोकथाम दिवस के अवसर पर इंदौर स्कूल ऑफ सोशल वर्क ने समाज कार्य विभाग के तत्वावधान में एक विशेष कार्यक्रम का आयोजन किया। इस कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य इंदौर को भारत का पहला मानसिक स्वास्थ्य के प्रति जागरूक शहर बनाने की दिशा में कदम बढ़ाना था।

कार्यक्रम में शहर के लगभग 50 गैर सरकारी संगठनों ने सक्रिय भागीदारी की और सामूहिक रूप से यह संकल्प लिया कि मानसिक स्वास्थ्य, जागरूकता और निवारक उपायों को समाज में प्राथमिकता दी जाएगी।

वक्ताओं ने बताया कि मध्य प्रदेश हाल ही में आत्महत्या दर के मामले में देश में तीसरे स्थान पर रहा है, जो तनाव, अवसाद और समय पर सहायता न मिल पाने जैसी गंभीर मानसिक स्वास्थ्य समस्याओं की ओर संकेत करता है। विशेषज्ञों ने चेतावनी दी कि यदि इस पर ध्यान नहीं दिया गया, तो इसके सामाजिक और आर्थिक दुष्परिणाम व्यापक होंगे।

समारोह को संबोधित करते हुए मनोचिकित्सा विभाग के प्रमुख श्री आनंद गौड़ ने कहा कि आत्महत्या की रोकथाम के लिए सामूहिक जिम्मेदारी और एकजुट कार्रवाई आवश्यक है। उन्होंने जागरूकता बढ़ाने, परिवारों और समुदायों का समर्थन करने तथा सहयोग को बढ़ावा देने पर विशेष बल दिया। अंत में सभी प्रतिभागी संगठनों और सदस्यों ने सामूहिक रूप से यह संकल्प लिया कि वे श्री आनंद गौड़ के मार्गदर्शन में निरंतर प्रयास कर इंदौर को एक मानसिक स्वास्थ्य के प्रति जागरूक शहर बनाने में योगदान देंगे।

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