आज सुनने वाले कम हैं सुनाने वाले अधिक और जिसमे सुनने की कला आ गई वो श्रावक कहलाते हैं। सुनना भी मात्र कानों से नहीं प्राणों से सुनना चाहिए। पढ़िए शुभम जैन की रिपोर्ट…
आगरा। हरीपर्वत स्थित श्री शांतिनाथ दिगंबर जैन मंदिर के आचार्य शांतिसागर सभागार में आगरा दिगम्बर जैन परिषद के तत्वावधान मे संस्कार प्रणेता आचार्य श्री सौरभसागर जी महाराज ससंघ के सानिध्य में सात दिवसीय आध्यात्मिक ज्ञान शिक्षण शिविर का शुभारंभ हुआ। शुभारंभ मंगलाचरण एवं दीप प्रज्ज्वलन के साथ हुआ। इसमें 250 शिविरार्थियों को छहढाला ग्रन्थ का स्वाध्याय कराया। शिविर में आचार्य श्री सौरभ सागर जी महाराज ने शिविरार्थियों को मंगल प्रवचन देते हुए बताया कि आज सुनने वाले कम हैं सुनाने वाले अधिक और जिसमे सुनने की कला आ गई वो श्रावक कहलाते हैं। सुनना भी मात्र कानों से नहीं प्राणों से सुनना चाहिए।
छहढाला शब्द की विवेचना करते हुये उन्होने बताया कि जैन दर्शन मे छह अंक की कुछ अलग विशेषता है जैसे प्रथम तीर्थंकर भगवान ऋषभदेव ने श्रावक की जीविका के लिए 6 कला श्रावक के लिए भी 6 आवश्यक कर्तव्य, मुनियों के लिये 6 आवश्यक क्रियाएं, 6 काल 6 द्रव्य व मूल ग्रंथ भी 6 को लेकर षटखंडागम है। इसी प्रकार छहढाला में 6 प्रकार से कर्मो की मार से बचने का मार्ग है।

उन्होने छहढाला के मंगलाचरण की विवेचना करते हुए बताया कि जैसे सर्वप्रथम छहडाला में वीतराग विज्ञानता को नमस्कार बताया है वैसे ही लौकिक दुनिया में भी शिशु को सर्वप्रथम कान में नवकार मन्त्र सुनाकर नमन उसके जीवन में डालते हैं। क्योकि जो नवता है वह आगे बढता है। इस अवसर पर बाहर से आए हुए भक्तों ने आचार्यश्री के चरणों में श्रीफल भेंटकर मंगल आशीर्वाद प्राप्त किया। मंच का संचालन मनोज जैन बाकलीवाल ने किया। इस अवसर पर जगदीश प्रसाद जैन, राकेश जैन पर्देवाले, सुनील जैन ठेकेदार, अनंत जैन, अक्षय जैन, पवन जैन, सुभाष जैन, सुबोध पाटनी, हीरालाल बैनाड़ा, अजित जैन, विमल जैन, मीडिया प्रभारी शुभम जैन समस्त आगरा, दिल्ली, ग्वालियर, मुरैना समेत अनेक स्थान के जैन समाज के लोग बड़ी संख्या में पधारे।













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