अरिहंत विहार वह स्थल है, जिसके मूलनायक श्री पारसनाथ भगवान की प्राण प्रतिष्ठा आचार्य विद्यासागरजी महाराज ने की थी। यह उद्गार मुनि श्री संभवसागरजी महाराज ने अरिहंत विहार दिगंबर जैन मंदिर में गुरु उपकार भवन के लोकार्पण समारोह में व्यक्त किए। विदिशा से पढ़िए, यह राजीव सिंघई की खबर…
विदिशा। अरिहंत विहार वह स्थल है, जिसके मूलनायक श्री पारसनाथ भगवान की प्राण प्रतिष्ठा आचार्य विद्यासागरजी महाराज ने की थी। यह उद्गार मुनि श्री संभवसागरजी महाराज ने अरिहंत विहार दिगंबर जैन मंदिर में गुरु उपकार भवन के लोकार्पण समारोह में व्यक्त किए। उन्होंने कहा कि स्वयं आचार्य श्री ने इस मंदिर की नींव रखी तथा वेदी प्रतिष्ठा कलश के आरोहण में वह स्वयं पधारे और संपूर्ण अरिहंत विहार को गुरुदेव ने अपनी परम रज से पवित्र किया। मुनि श्री ने कहा कि आज आप लोगों ने गुरु उपकार भवन का लोकार्पण किया और हम सभी उसके साक्षी बने। मुनि श्री ने कहा कि यह कार्य आचार्य श्री के द्वितीय समाधि दिवस पर ही संपादित होना था, उसी अनुसार उसका निमित्त बना। राष्ट्रीय प्रवक्ता अविनाश जैन विद्यावाणी ने बताया आचार्य श्री विद्यासागरजी का द्वितीय समाधि दिवस के अवसर पर 17 से 18 फरवरी की मध्यरात्रि में छत्तीसगढ़ के डोंगरगढ़ पहाड़ी के चंद्रगिरि पर आचार्य गुरुदेव श्री विद्यासागर जी महामुनिराज ने अपनी अंतिम सांस ली थी।
मंगलवार को आचार्य गुरुदेव की प्रतिमा का पदार्पण
गुरुदेव के उन उपकारों को याद करते हुए तीन दिवसीय गुरु अर्चना महोत्सव 16 से 18 फरवरी तक अरिहंत विहार मंदिर परिसर में रखा गया है, जिसके प्रथम दिवस भगवान जिनेंद्र देव का अभिषेक एवं नित्य नियम पूजन उपरांत आचार्य गुरुदेव की संगीतमय पूजन किया गया। गुरुदेव के उपकारों को याद किया गया। गुरु उपकार भवन का लोकार्पण एवं वेदी शुद्धि का कार्यक्रम मंत्रोच्चारण के साथ मुनिसंध के सानिध्य में किया गया। कार्यक्रम के दूसरे दिवस मंगलवार को आचार्य गुरुदेव की प्रतिमा का पदार्पण होगा तथा उनके चरण कमल को विराजमान कर शुद्धि की जाएगी एवं मुनिसंघ की देशना होगी। इसी क्रम में 18 फरवरी को गुरुदेव की प्रतिमा को मूल वेदी पर विराजमान कर साथ में उपकरण एवं चरण कमल की स्थापना कर संगीतमय पूजन तथा मुनिसंघ की देशना होगी।
पहली बार बीस से अधिक निर्ग्रंथ मुनि दीक्षा
प्रवक्ता अविनाश जैन ने बताया श्री सकल दिगंबी जैन समाज की ओर से 19 फरवरी को सिद्धक्षेत्र ‘मुक्तागिरी में आचार्य गुरुदेव श्री समयसागर महाराज आचार्य बनने के बाद पहली बार बीस से अधिक निर्ग्रंथ मुनि दीक्षा प्रदान कर रहे हैं। इस कार्यक्रम में भाग लेने के लिये बड़ी संख्या में धर्म श्रद्धालु 18 फरवरी को बस एवं चार पहिया गाड़ियों के माध्यम से बैतूल जिले में स्थापित मुक्तागिरी सिद्धक्षेत्र पर पहुंचेंगे तथा क्षेत्र और गुरुदेव के दर्शन और उनका आशीर्वाद प्राप्त करेंगे।
नाम पंजीकरण करा लें
उल्लेखनीय है कि निर्ग्रंथ मुनि दीक्षा में विदिशा नगर के गौरव ऐलक श्री कैवल्य सागरजी महाराज तथा ऐलक श्री गरिष्ठ सागर जी महाराज का तथा संभवसागरजी महाराज, संघस्थ ऐलक गौरव सागरजी महाराज सहित कई अन्य मुनि, ऐलक एवं क्षुल्लक दीक्षा होंगी। विदिशा नगर से जो भी महानुभाव इस कार्यक्रम में भाग लेना चाहते हैं, वह अपने नाम सकल दिगंबर जैन समाज समिति के पदाधिकारियों से संपर्क कर रजिस्टर करा लें।













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