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आचार्य विहर्ष सागर महाराज और अंतर्मुखी मुनि पूज्य सागर महाराज के सानिध्य में आयोजन : घटयात्रा और ध्वजारोहण के साथ हुआ गणधर विलय महामंत्र पाठ का शुभारंभ


श्री 1008 मुनिसुव्रत नाथ दिगम्बर जैन मंदिर, स्मृति नगर में आचार्य विहर्ष सागर महाराज और अंतर्मुखी मुनि पूज्य सागर महाराज के सानिध्य में गणधर विलय महामंत्र पाठ का शुभारंभ हुआ। कार्यक्रम की शुरुआत घटयात्रा, ध्वजारोहण, मंडप प्रतिष्ठा के साथ हुई। घटयात्रा में बड़ी संख्या में महिलाएं-पुरुष शामिल रहे। पढ़िए यह विशेष रिपोर्ट…


इंदौर। श्री 1008 मुनिसुव्रत नाथ दिगम्बर जैन मंदिर, स्मृति नगर में आचार्य विहर्ष सागर महाराज और आचार्य श्री अभिनंदन सागर महाराज के शिष्य अंतर्मुखी मुनि पूज्य सागर महाराज के सानिध्य में गणधर विलय महामंत्र पाठ का शुभारंभ हुआ।

कार्यक्रम की शुरुआत घटयात्रा, ध्वजारोहण, मंडप प्रतिष्ठा के साथ हुई। घटयात्रा में बड़ी संख्या में महिलाएं-पुरुष शामिल रहे।

घटयात्रा के बाद मंदिर में भगवान महावीर की शांतिधारा की गई, जिसका सौभाग्य प्रिंयक शाह, सत्येंद्र जैन को प्राप्त हुआ। मंदिर में ध्वजारोहण का सौभाग्य जंबू कुमार जैन और शिखर पर ध्वजारोहण का सौभाग्य प्रदीप कुमार जैन, संगम नगर को प्राप्त हुआ। इस अवसर पर मंदिर और रास्ते में आचार्य श्री विहर्ष सागर जी महाराज का पाद प्रक्षालन समाजजनों द्वारा किया गया।

भक्ति में होता है चमत्कार

कार्यक्रम में आचार्य श्री विहर्ष सागर जी महाराज ने कहा कि भारत देश भक्ति से ही पहचाना जाता है। देश में चंदना, शबरी, मीरा आदि महिलाएं हुई हैं, जिन्होंने भक्ति के माध्यम से स्वयं को पवित्र बनाया और धर्म से जोड़ा। भक्ति में ही चमत्कार होता है।

मूर्तियों और अन्य सिद्धक्षेत्रों में हमें जो अतिशय दिखाई देता है, वह भी भक्ति का ही प्रभाव है। माता सीता ने जब अग्नि परीक्षा दी, तो अग्नि तुरंत जल बन गई, यह माता सीता की भक्ति का ही परिणाम था।

होती है कर्मों की निर्जरा

अंतर्मुखी मुनि श्री पूज्य सागर महाराज ने भी प्रवचन दिए। उन्होंने कहा कि गणधर वलय महामंत्र मेे पांचों परमेष्ठियों को नमस्कार कर उनकी आराधना की गई है। इस महामंत्र का पाठ करने से असंख्यात कर्मों की निर्जरा होती है। द्रव्य शुद्धि और भाव शुद्धि के साथ ही अनुष्ठान करने से ही फल प्राप्त होता है।

उन्होंने कहा कि गणधर वलय महामंत्र आराधना से आप सबके जीवन में सुख-शांति और समृद्धि का वास होगा। कार्यक्रम का संचालन ब्र. तरुण भैया ने किया।

सभी विधि-विधान अजय भैया के निर्देशन में किए गए। इस अवसर पर क्षुल्लक अनुश्रमण सागर महाराज भी मौजूद रहे।

हर रोज एक मंत्र की व्याख्या

गणधर वलय महामंत्र के पाठ के तहत 23 जुलाई से मुनि श्री पूज्य सागर महाराज प्रतिदिन एक-एक मंत्र की व्याख्या कर उसका महत्व बताएंगे। प्रवचन का समय प्रात: 8:45 रहेगा और स्थान मंदिर परिसर रहेगा।

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